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स्ट्रे डॉग्स: निगम कमिश्नर की पेशी तय हो: हाईकोर्ट

7 वर्ष पहले
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स्ट्रेडॉग्स को लेकर हाई कोर्ट में प्रशासन और निगम की तरफ से बुधवार को कोई हाजिर नहीं हुआ। जस्टिस राजन गुप्ता ने इस लापरवाह रवैये पर नगर निगम के कमिश्नर को शुक्रवार को कोर्ट में तलब किया है। उन्होंने कहा कि पैरवी करना प्रशासन निगम के लापरवाह रवैये को उजागर करता है। ऐसे में चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के जरिये निगम कमिश्नर की पेशी हाईकोर्ट में सुनिश्चित की जाए।

इससे पहले हाईकोर्ट ने पूछा था कि वैक्सीनेशन दिए जाने के बाद स्ट्रे डॉग्स की पहचान कैसे की जाती है। क्या कोई टोकन या कॉलर आइडेंटिफिकेशन की जाती है या नहीं। इस पर निगम के वकील ने समय दिए जाने की मांग की। नगर निगम पार्षदों और अफसरों के नासिक टूर से शहर को स्ट्रे डॉग्स से बचाने के सुझावों पर निगम ने जवाब दायर कर कहा था कि स्ट्रे डॉग्स की बड़े स्तर पर स्टर्लाइजेशन के लिए एनजीओ का सहयोग लेने का फैसला लिया गया है। इसके लिए बिड मांगी गई थी जो 3 नवंबर को खुल गई। सफल रहने वाले बिडर को रोजाना 16 से 20 डॉग्स की स्टर्लाइजेशन करनी होगी। हर महीने 450 स्ट्रे डॉग्स स्टर्लाइज किए जाएंगे। निगम ने कहा गया कि स्ट्रे डॉग्स पकड़ने के लिए 2 नई गाड़ियां खरीदने का फैसला लिया गया है। नगर निगम के मेडिकल ऑफिसर डा. पी.एस. भट्टी ने जवाब दायर कर कहा कि रैबीज के मामलों से निपटने के लिए एंटी रैबीज स्टॉक तैयार किया है। इसके तहत सेक्टर-19 और सेक्टर 38 की डिस्पेंसरी में एंटीरैबिज मेडिसिन की 10 हजार यूनिट मौजूद हैं। सस्ती एंटी रैबीज दवा के लिए भी प्रबंध किए जा रहे हैं। जिसके तहत एंटी रैबीज सिरप 100 रुपए तथा टीका 50 रुपए में मार्केट में मौजूद होगा।

चंडीगढ़ के रहने वाले गुरमुख सिंह ने याचिका दायर कर कहा कि चंडीगढ़ में स्ट्रे डॉग्स तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके चलते शहर के सबसे खास रोज गार्डन में सुबह सैर करने वालों को परेशानी हाे रही है। ऐसे में जरूरी कार्रवाई की जाए।