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मृत शरीरों से पता चला हर 10 साल बाद कैसे खराब होती हैं हमारी आंखें

7 वर्ष पहले
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पीजीआईको डोनेट मृत शरीरों की मदद से ये पता चलता है कि हर दशक के बाद हमारी आंखें किस हद तक प्रभावित होती जाती हंै। पीजीआई ने ऐसी 25 बॉडीज की मदद से देखने की क्षमता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारणों का पता लगाने में सफलता हासिल की है। हर दशक में आंखों के रेनिटल लेयर्स में होने वाले बदलाव और छोटा होता आंखों का सैल साइज जैसे कारणों की सही स्थिति का पता लगाया गया है। पीजीआई को डोनेट हुई 22 साल से 99 साल की बॉडी की आंखों की स्थिति पर रिसर्च में ये जानने में मदद मिली कि हर दशक में बढ़ती उम्र के साथ विजुअल लॉस का चांस कितना बढ़ता जाता है। पीजीआई के एनाेटॉमी डिपार्टमेंट की डॉ. तुलिका गुप्ता की इस स्टडी में यह पता लगाया गया है कि विजुअल पॉवर प्रभावित होने की संभावना बढ़ती जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रेनिटल लेयर्स में बदलाव होता जाता है। इस स्ट्डी में डोनेट हुई हर दशक की बॉडी के रेनिटल पिगमेंट से पता चला कि आंखों के सैल साइज कम होते जाते हैं। इसी तरह ये भी पता लगाया गया कि अांखों के कोंस कम होने के साथ ही आउटर प्लेक्सीफॉर्म लेअर भी मोटी होती जाती है। इस स्ट्डी में नर्व फाइबर लेअर को भी काउंट किया गया। हर दशक की बॉडी से लिए गए रेनिटल लेयर्स की स्थिति, आंखों के सैल साइज और नर्व फाइबर लेयर को अलग-अलग काउंट किया गया। स्ट्डी में शामिल हर दशक के व्यक्ति की डेड बॉडी से लिए गए डाटा मरीजों के इलाज में मदद करेगा।

डॉ. तुलिका गुप्ता बताती हैं कि इन डेड बॉडी की आंखों से लिया गया डॉटा असामान्य हालत और प्री. मेच्योर एज में होने वाले विजुअल लॉस काे दूर करने में मदद करेगा। ये डॉटा आंखों के डॉक्टरों के लिए उम्र के साथ जुड़े आंखाें के डिस्ऑर्डर से बचाव की नई तकनीक और मेडिसिन बनाने में भी सहायक साबित हो सकती है।