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झूठे सबूत पेश करने में तीन आईपीएस को राहत

7 वर्ष पहले
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बादलपरिवारकी आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच करने वाले तीन आईपीएस अधिकारियों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस आशुतोष मोहंता ने आईपीएस अधिकारी बीके उप्पल, एस चट्टोपाध्याय और सुरेंद्र पाल सिंह की अपील स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ पर जरी (झूठे साक्ष्य पेश करना) की कार्रवाई खारिज करने के निर्देश दिए हैं। मोहाली की विशेष अदालत ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल उनकी प|ी सुरेंद्र कौर बादल, बेटे डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले को खारिज करने के निर्देश दिए थे। विशेष अदालत ने इस मामले की जांच करने वाले तीनों आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ पर जरी की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

मोहाली की विशेष अदालत ने एक अक्टूबर 2010 को इस मामले में बादल परिवार को बाइज्जत बरी तो कर दिया। लेकिन, मामले की जांच करने वाले आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ झूठे साक्ष्य जुटाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। विशेष अदालत ने कहा कि बादल परिवार को दोषी साबित करने के लिए जिन आवश्यक प्रमाणों की आवश्यकता थी उनका अभाव था। ऐसे में सबूतों के अभाव में उन्हें दोषी करार नहीं दिया जा सकता। इसके बाद तीनोंं आईपीएस अधिकारी विशेष अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे। बुधवार को हाईकोर्ट ने तीनो अधिकारियों की अपील को मंजूर करते हुए विशेष अदालत की टिप्पणी खारिज करने के निर्देश दिए।