- Hindi News
- नौकरी के बाद 5 साल तक िखलाड़ियों का खेल से जुड़े रहना होगा जरूरी: विज
नौकरी के बाद 5 साल तक िखलाड़ियों का खेल से जुड़े रहना होगा जरूरी: विज
बदलेगी प्रदेश की खेल नीति, 12 जनवरी को होगी घोषणा, रेफरी अंपायर होंगे पुरस्कृत
कोटेमेंनौकरी लेने के बाद िखलाड़ी का कम से कम पांच साल तक खेलों के िलए काम करना जरूरी होगा। ऐसा करने वाले खिलाड़ियों की नौकरी पर सरकार पुनर्विचार कर सकती है। स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने बुधवार को चंडीगढ़ में नई खेल नीति के बारे में कोच और खिलाड़ियों से सुझाव लेने के बाद यह बात कही। यह खेल नीति 12 जनवरी, 2015 को घोषित होगी।
नई सरकार का मानना है कि प्रदेश में खेल कोटे से नौकरी लेने के बाद खिलाड़ी अपने लक्ष्य को भूल जाते हैं। उनका खेलों के प्रति कोई योगदान नहीं रहता। इसी तरह पदक पाने के बाद भी खिलाड़ी खेलना छोड़ देते हैं। यही वजह है कि प्रदेश में खेल का स्तर गिरा है। ऐसे पदक पाने वाले खिलाडि़यों ने तो अपने खेल को आगे बढ़ाया है और ही दूसरे खिलाड़ी तैयार करने में कोई सहयोग दिया है। सरकार का कहना है कि जो खिलाड़ी खेल कोटे से नौकरी प्राप्त कर खेल के प्रति उदासीन हैं, उनके बारे में पुनर्विचार किया जाएगा। हरियाणा निवास में करीब 8-9 घंटे चली बैठक में विज ने आग्रह किया कि खेल अकादमियों और समितियों को नए कानून के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। विज ने कहा, पिछली सरकार की खेल नीति में खामियों के कारण हमारी सरकार को बदलाव करना पड़ रहा है। खेलों में पारदर्शिता लाने के लिए उचित कदम उठाने होंगे ताकि कमजोर परिवारों के बच्चे भी खेलों में आगे बढ़ सकें। बैठक में ओलंपिक पदक विजेता बॉक्सर विजेंद्र कुमार, पहलवान सुशील कुमार समेत द्रोणाचार्य अवार्डी खिलाड़ी, राजीव गांधी खेल र| अवार्डी, भीम अवार्डी, भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय निदेशक, मोती लाल नेहरू खेल स्कूल राई के प्रधानाचार्य निदेशक, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के खेल निदेशक मौजूद थे।
पॉिलसी के िलए बैठक में ये सुझाव भी आए
{पुरस्कृत खिलाडिय़ों को नौकरी के दौरान खेल को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए। उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के नए बच्चों को आगे लाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि नए खिलाड़ी तैयार हो सकें।
{ निगम-बोर्ड, कॉरपोरेशन अपने स्तर पर एक-एक खेल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लें।
{ खेलों के प्रति युवाओं को आकर्षित करने के लिए 1996 के बाद अब तक सभी खिलाड़ियों