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निगम के 3 अफसरों, सेलवेल के डायरेक्टर-मैनेजर पर केस
राजबीर सिंह राणा | चंडीगढ़ rs_rana@dbcorp.in
86 टॉयलेट ब्लॉक अलॉटमेंट घोटाले में सीबीआई ने बुधवार को नगर निगम के तीन अफसरों और सेलवेल कंपनी के डायरेक्टर मैनेजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के अलॉटमेंट लेटर में सेलवेल को एडवर्टाइजमेंट टैक्स/फीस में गैरकानूनी तरीके से छूट देने का है। एफआईआर की कॉपी सीबीआई स्पेशल जज विमल कुमार की कोर्ट जमा करवा दी गई है। एफआईआर में निगम के मौजूदा सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरसी दीवान, पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सीता राम अग्रवाल, पूर्व चीफ इंजीनियर एसके बंसल शामिल हैं। एफआईआर में सेलवेल के डायरेक्टर रुस्तम और मैनेजर विश्वजीत दत्ता का भी नाम है। जांच के दौरान सीबीआई ने ओएसडी टू, चीफ ऑडिटर और जॉइंट कमिश्नर रहे कमलेश कुमार से भी पूछताछ की थी।
सीबीआई एसपी तरुण गाबा का कहना है कि सेलवेल टॉयलेट अलॉटमेंट मामले में डीडीआर दर्ज करके जांच शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद बुधवार को एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
सेलवेल को एडवर्टाइजमेंट फीस में छूट देकर फायदा पहुंचा रहे थे निगम के अफसर। इसका खुलासा भास्कर ने ही किया था।
सीबीआई 2007 में रही फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी की चेयरपर्सन हरजिन्दर कौर, मेंबर जितेन्द्र भाटिया, राजेश गुप्ता, एमपीएस चावला, कमलेश और कुलदीप सिंह से पूछताछ कर चुकी है। सभी ने जांच में बताया कि सेलवेल को मेंटेनेंस एंड ऑपरेशन पर 86 टॉयलेट ब्लॉक अलॉट करने की चर्चा ही नहीं हुई थी। ही एडवर्टाइजमेंट टैक्स/फीस छूट देने पर चर्चा हुई थी। इसमें छूट देने के लिए चीफ एडमिनिस्ट्रेटर तक केस भेजा जाना था। वहां तक केस भेजा ही नहीं गया। सभी ने सीबीआई को बताया था कि 2007 में पब्लिक हेल्थ के एक्सईएन (अब सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर) आरसी दीवान, तब सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पब्लिक हेल्थ सीता राम अग्रवाल और चीफ इंजीनियर एसके बंसल की भूमिका संदिग्ध थी।
नगर निगम ने 86 टॉयलेट ब्लॉक मेंटेनेंस के लिए सेलवेल कंपनी को दिए थे। टॉयलेट ब्लॉक्स पर कंपनी ने एडवर्टाइजमेंट डिस्पले किए। नियम के मुताबिक इसकी फीस निगम को मिलनी चाहिए थी, लेकिन हुआ उलटा। अक्टूबर 2007 से 31 मार्च 2014 निगम ही कंपनी को मेंटेनेंस चार्ज देती रही, एडवर्टाइजमेंट फीस वसूली ही नहीं गई। इस घोटाले में सीबीआई ने 28 मार्च 2014 को सेलवेल के पांच डायरेक्टर और निगम के तीन अफसरो