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चरणदास चोर ईमानदार होता है

7 वर्ष पहले
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‘चरणदासका पेशा चोरी करना है। उसे एक दिन गुरु राम मिलते हैं जो उसे समझाते हैं कि चोरी करना गलत बात हैं। लेकिन वह उनकी बात ना मानते हुए कहता है कि इसी में मजा है। गुरु उसे कहते हैं ठीक है अगर तुम चोरी करना नहीं छोड़ सकते तो झूठ बोलना छोड़ दो आैर मुझे 4 वचन दो। पहला तुम सोने की थाली में खाना नहीं खाओगे। दूसरा हाथी घोड़े की सवारी नहीं करोगे। तीसरा किसी रानी से शादी नहीं करोगे आैर चौथा किसी देश के राजा नहीं बनोगे। चरणदास उनकी बात मान लेता है। उसके बाद वह सच बोलकर चोरी करना शुरू कर देता है और करोड़पति बन जाता है। जब वह दोबारा गुरु राम से मिलता है तो गुरु उसे कहते हैं कि अब तो तुम अमीर आदमी बन गए हो तो चोरी करना छोड़ दो। चरणदास गुरु को जवाब देता है कि एक बार यहां की रानी के यहां चोरी कर लूं फिर मैं चोरी करना छोड़ दूंगा। वह रानी के यहां चोरी करता है और पकड़ा जाता है। उसे रानी के पास लेकर जाया जाता है। रानी जब उससे चोरी करने की वजह पूछती है तो वह सबकुछ सच बता देता है। रानी उसकी ईमानदारी से खुश होकर अपने नौकरों को आदेश देती है कि इसे हाथी घोड़े की सैर करवाओ। लेकिन वह मना कर देता है। उसके बाद रानी आदेश देती है कि सोने की थाली में खाना खिलाओ। चरणदास इससे भी इंकार कर देता है। रानी को गुस्सा जाता है और वह चरणदास को जेल में बंद करवा देती है। लेकिन कहीं ना कहीं वह चरणदास से प्यार करने लगती है। एक रात रानी चुपके से चरणदास को जेल में मिलने जाती है और शादी का प्रस्ताव उसके सामने रखती है। वह कहती है मुझसे शादी करके तुम इस देश के राजा बन जाओ। लेकिन वह साफ इंकार देता है और रानी को बताता है कि मैंने अपने गुरु को प्रण दिए हैं। इसलिए मैं आपकी कोई भी बात नहीं मान सकता। रानी चरणदास को मरवा देती है। पूरी कहानी में दिखाया गया कि ईमानदारी और गुरु के आदेशों की जीवन में क्या महत्व है।’ यह कहानी है नाटक चरणदास चोर की। इसे न्यू पब्लिक स्कूल की तरफ से बुधवार टैगोर थिएटर में खेला गया। यह एक मीनिंगफुल कॉमेडी नाटक था। इसे जुबिन मेहता ने डायरेक्ट किया आैर पुनीत जिवंदा इसके कोरियोग्राफर हैं। स्कूल के 80 स्टूडेंट्स ने नाटक में अपनी परफॉर्मेंस दी। यह नाटक हबीब तनवीर का लिखा हुआ है।

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