‘मैं तो मुंबई सिंगर बनने के लिए गया था’
\\\"बचपनमें माता की चौकी पर गाना गाता था। ढोलक के साथ अकसर कोरस भी गाता था। इस तरह से भक्ति गीतों का हिस्सा बनते हुए एक सिंगर के साथ मुझे आलाप करने का मौका मिला। मेरी आलाप को सुनकर मंडली के दूसरे लाेग बेहद हैरान हुए। बोले, ये लड़का तो मंडली के बाकी लोगों की छुट्टी कर देगा।\\\' अपने बचपन की यह कहानी टीवी एक्टर निखिल मेहता ने सुनाई। वे चंडीगढ़ में एक पर्सनल विजिट पर थे।
निखिल को कैडबरी की एड की वजह से पहचाना जाता है। अपने एक्टर बनने की कहानी के बारे में बोले, \\\"सिंगर बनने की चाहत ने मुझे मुंबई पहुंचाया। जब पैरेंट्स से मुंबई जाने की बात कही तो मम्मी ने साफ मना कर दिया। वे बोलीं कि दिल्ली से दूर जाने की कोई जरूरत नहीं। यही रहकर कोई बिजनेस करो। मैं भी थोड़ा जिद्दी था। इसलिए जैसे-तैसे करके मुंबई पहुंचा। कुछ दिनों के बाद ही घर वालों को मिस करने लगा। इसलिए मुंबई में बोरियत होने लगी। यही वजह थी कि दो महीने बाद घर वापिस गया। डैड ने पूछा, बन गया सिंगर? हो गए ख्वाब पूरे? फिर उन्होंने समझाते हुए कहा, \\\"बेटा हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। चाहे मंजिल तक पहुंचने में परेशानी ही क्यों हो। इस तरह मोटिवेट करने के बाद डैड ने मुंबई की टिकट मेरे हाथ में थमा दिया। दोबारा मुंबई मैं नए जोश के साथ पहुंचा और अपनी जगह बनाई।\\\'
यूं मिला था शो \\\"द बडी प्रोजेक्ट\\\'
\\\"द बडी प्रोजेक्ट\\\' के लिए निखिल ने चार बार ऑडिशन दिया। ऑडिशन के इस किस्से को वे आज भी भूल नहीं पाए हैं। बताते हैं, \\\"पहले शो में केडी के लीड रोल के लिए बुलाया गया। यह आठ दोस्तों की कहानी थी। प्रोड्यूसर को लगा कि मैं लीड रोल के लिए सही नहीं हूं। इसलिए उन्होंने मुझे सेकेंड लीड के लिए बुलाया। उन्हें एक बार फिर लगा कि यह कैरेक्टर भी मेरे लिए नहीं है। उसके बाद उन्होंने थर्ड लीड के लिए मुझे चुना। आखिरकार मुझे पिद्दी के रोल के लिए चुना गया। इस रोल के लिए मैंने अपनी सारी जान लगा दी। डायरेक्टर, प्रोड्यूसर को इतना पसंद आया कि वे मुझे ना नहीं कर पाए। इस रोल में 70 परसेंट डॉयलाग मैंने आप डाले हैं।
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