काफी कुछ समझा गया नाटक \"हल्ला बोल\'
भ्रष्टाचारक्यों होता है? देश में रेप की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं? रोड एक्सीडेंट्स क्यों होते हैं? गरीब मेहनत की बजाय मांगने में क्यों विश्वास करता है? यह चार सवाल छोड़ गया हिंदी नाटक, \\\"हल्ला बोल।\\\' बुधवार शाम मोहाली की माय ड्रीम अकादमी के स्टूडेंट्स और बडिंग एक्टर्स ने इसे पेश किया। इसकी स्क्रिप्ट तैयार की है इसके डायरेक्टर चक्रेश कुमार और इसमें एक्ट करने वाले स्टूडेंट्स ने। यह नाटक 25 मिनट का था। एक्ट करने वालों में अनमोल, रेस्टी, जतिंदर,गौरव कंबोज, अपूर्वा, वृषभ, जसप्रीत, राजवीर, बलराज और गुर परम हैं। अपूर्वा ने इसमें सूत्रधार का किरदार अदा किया। नाटक में चार इश्यूज को आपस में पिरोकर एक कहानी तैयार की गई थी।
इसमें दिखाया गया कि किस तरह आम आदमी सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाता है और बिना रिश्वत दिए उसका कोई काम नहीं होता। इस तरह हर काम के लिए उसका समय भी बर्बाद होता है और पैसा भी। वहीं दूसरी कहानी में दिखाया गया कि चार कॉलेज स्टूडेंट्स एक ही बाइक पर सवार होकर सड़क पर ट्रैफिक रूल्स को तोड़ते हैं। एक पुलिस वाला उन्हें समझाने की कोशिश करता है तो वह उसे भी रिश्वत देने लगते हैं। आगे चलकर इन लड़कों का एक्सिडेंट हो जाता है। इसके बाद वह प्रण करते हैं कि सड़क पर चलते हुए हमेशा ट्रैफिक रूल्स को फॉलो करेंगे। इन दोनों कहानियों के माध्यम से ऑडियंस को यह भी बताने की कोशिश की गई कि रिश्वत देना हमारी आदत बन चुकी है। अगर हम इसका विरोध करेंगे तो कोई भी काम के बदले पैसा मांगने की हिम्मत नहीं करेगा। वहीं तीसरी कहानी में इस बात को रखा गया कि हमारे देश में रेप अौर मॉलेस्टेशन के केसेज क्यों बढ़ रहे हैं। वजहों में अशिक्षा और इंसानियत का खत्म होना शामिल था। इसमें मैसेज दिया गया कि जब तक घर में औरत की इज्जत नहीं होगी, तब तक उनके प्रति बाहर भी लोगों का नजरिया वैसा ही रहेगा। आखिरी कहानी मेें दिखाया गया कि हमारे देश में गरीब आदमी गरीबी में रहकर ही एंजॉय करता है। मेहनत की बजाय वह मांगने में विश्वास करता है। वह भीख से मिले पैसे के नशे में रहकर, उसी में गुजारा करके खुश रहता है।
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