पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पाटिल ने रिजेक्ट की 1700 फ्लैट्स की हाउसिंग स्कीम

पाटिल ने रिजेक्ट की 1700 फ्लैट्स की हाउसिंग स्कीम

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
शहर में प्राइवेट डेवलपर हाउसिंग स्कीम नहीं लॉन्च कर सकते

4

तीन मंजिला मकानों में एक्सट्रा फ्लोर से इनकार

अपार्टमेंट एक्ट शहर में लागू नहीं किया जा रहा

रेड लाइन के बाहर मकानों की खरीद-फरोख्त बंद

हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट्स की ट्रांसफर बंद कर दी

हाउसिंग सोसायटी के फ्लैट्स खरीद पर रोक

लीज होल्ड फ्लैट्स को फ्री होल्ड करने पर रोक

7

3

6

2

5

1

ताजा मामला रेलवे के ड्रीम प्रोजेक्ट का है, जिसके तहत चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाया जाना है। रेलवे की 500 एकड़ जमीन पर कमर्शियल हब डेवलप किया जाना है। प्रशासन यह कहकर मंजूरी नहीं दे रहा कि इतने बड़े एरिया पर प्रोजेक्ट की मंजूरी नहीं दे सकते।

चंडीगढ़ प्रशासन छह सालों से एक भी हाउसिंग स्कीम लाॅन्च नहीं कर पाया, जबकि गमाडा एयरोसिटी, इकोसिटी सहित मल्टीस्टोरी फ्लैट्स की दो हाउसिंग स्कीम लाॅन्च कर चुका है। हुडा भी हाउसिंग स्कीम लेकर चुका है। चंडीगढ़ में चार साल से रेजिडेंशियल साइट्स की नीलामी भी नहीं हुई है।

प्रशासन ने शहर में पिछले छह साल से कोई हाउसिंग स्कीम लॉन्च नहीं की। इसके साथ ही प्रशासक पाटिल ने लोगों के लिए अन्य दरवाजे भी बंद कर दिए हैं।

गमाडा और हुडा ने लॉन्च की 6 हाउसिंग स्कीम

पब्लिक के पास ऑप्शन ही नहीं

इससे पहले साल 2008 में जनरल हाउसिंग स्कीम लाॅन्च की गई थी। उस स्कीम के 1800 अलाॅटीज 6 साल से फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं। इन्हें सेक्टर-63 में बन रहे अपने फ्लैट्स का कब्जा तक नहीं मिला है।

जनवरी 2008 में लॉन्च इम्प्लाॅइज हाउसिंग स्कीम का ड्राॅ दिसंबर 2010 में निकाला गया। इसमें 3900 इम्प्लाॅइज का नाम निकला, लेकिन आज तक फ्लैट नहीं मिले। प्रशासन का कहना है कि उसके पास जमीन नहीं है। इम्प्लाॅइज हाउसिंग सोसायटी ने प्रशासन के खिलाफ हाईकोर्ट में केस किया हुआ है।

पाटिल साहब का कार्यकाल एक महीने ही बचा है। चंडीगढ़ के इतिहास में शिवराज पाटिल ऐसे प्रशासक के रूप में दर्ज होंगे, जिनके कार्यकाल के दौरान शहर के मेगा प्रोजेक्ट्स रद्द होते गए। शहर को कोई नया प्रोजक्ट मिला नहीं। शहर के हाथ से मेडीसिटी, एजुसिटी, फिल्मसिटी, थीम पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स फिसल चुके हैं। कुल मिलाकर करीब 1800 करोड़ रुपए के इन प्रोजेक्ट्स को पंजाब ने दोनों हाथों से लपक लिया है। यानी जो इन्वेस्टमेंट चंडीगढ़ में होनी थी वो पंजाब में