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लल्लू की राजनीति से शुरू होती है कहानी

7 वर्ष पहले
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इम्पैक्टआर्ट्स नाटक ‘लल्लू राजकुमार ते तीन रंगी परी’ का मंचन करने जा रहा है। यह पॉलिटिक्स पर कॉमेडी स्टायर है। राजनीति किस तरह से आम आदमी को स्वार्थी बना देती है आैर कैसे उसके लिए इमोशंस और रिलेशंस की कोई वेल्यू नहीं रहती। कैसे हर इंसान पॉलिटिक्स में आने के बाद सिर्फ अपनी खुशियों के बारे में सोचने लग जाता है। नाटक के जरिए कुछ यही बताने की कोशिश की जाएगी। यह जानकारी प्ले के डायरेक्टर बनिंदरजीत सिंह बन्नी ने पंजाब कला भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस दौरान दी। इसे राइटर पाली भुपिंद्र ने लिखा है। कॉमेडी के साथ-साथ इसमें इंट्रो के दौरान कटपुतली स्टाइल बतौर एलिमेंट यूज किया है।

कुछऐसे शुरू होगा नाटक: एकराजा होता है जिसका बेटा अपने नाम लल्लू की तरह ही अकल से आधा होता है। राजा अपने देश में एलान करवाता है कि जो भी मेरे बेटे को राजनीति सिखा देगा। मैं उसे अपना आधा राज्य दूंगा। अगर जिम्मेदारी लेने के बाद वह नहीं सिखा पाया तो मैं उसे मरवा दूंगा। उसी राज्य में एक बूढ़ा व्यक्ति रहता है जो राजकुमार को राजनीति सिखाने की जिम्मेदारी लेता है। वह व्यक्ति राजकुमार लल्लू को पहले पाठ में सिखाता है कि राजनीति के तीन नियम हैं। पहला इसमें रिलेशन के लिए जगह नहीं, दूसरा इमोशन नहीं और तीसरा जो काम सबसे आसान लगता है वही सबसे मुश्किल है। राजकुमार राजनीति सीख जाता है आैर फिर शुरू होती है सस्पेंस से भरी असल कहानी।

कास्ट

राइटर: पालीभुपिंद्र

डायरेक्टर:बनिंदरजीत सिंह बन्नी

राजकुमार:सुरेंद्रसिंह

बुढ़ाव्यक्ति (टीचर): मनदीपमन्नी

सूत्रधार:विवेकरॉय खन्ना

राजा:अभयधर

सीमांत:धर्म

बैकस्टेज : मनोजकुमार

नेहाप्रीत ढिल्लों: आजादी

कमलदीपकौर: जनतादेवी

रिंपल:राक्षस

अर्थ:मनु

वर्दी: गुरबीरगुरी

समयअवधि: एकघंटा 50 मिनट

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