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- ...ताे उन्हें टैगोर से पहले नाेबेल पुरस्कार मिलता
...ताे उन्हें टैगोर से पहले नाेबेल पुरस्कार मिलता
“तमिलभाषा के महाकवि सुब्रमण्यम भारती के तमिल के ही नहीं बल्कि भारतीय साहित्य के ऐसी विभूति हैं जिन्होंने अपने समय को केवल वाणी प्रदान की अपितु अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित किया। यह बातें चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के सचिव वरिष्ठ साहित्यकार माधव कौशिक ने वीरवार को पीयू के हिंदी विभाग में आयोजित एक विशेष लेक्चर के दाैरान कहे। वीरवार को हिंदी विभाग में यूजीसी के निर्देशानुसार तमिल भाषा के महाकवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती मनाई। कौिशक ने कहा कि वे पत्रकारिता के माध्यम से चेतना का संचार फूंकने वाले ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने राष्ट्रीयता का अलख जगाया। यदि उनके साहित्य का समय पर अनुवाद हो जाता तो संभवत उन्हें टैगोर से बहुत पहले नोबेल पुरस्कार मिल गया होता। माधव ने ‘भारती’ की रचनाधर्मिता के विविध आयामों पर भी प्रकाश डाला। इस व्याख्यान पर विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार, प्रो. नीरजा सूद, डॉ. सत्यपाल सहगल, प्रो. बैजनाथ प्रसाद एवं प्रो. नंदिता (डी.एस.डब्लयू. वुमन), विभागाध्यक्ष डॉ. मनविंद्र कौर (वुमन स्टडीज़ डिपार्टमेंट) एवं डॉ. राजेश कुमार चन्द्र (वुमन स्टडीज़ डिपार्टमेंट) इत्यादि उपस्थित रहे। हिन्दी-विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने भी अंतर-प्रांतीय भाषाओं एवं विश्वविद्यालयों के भाषा विभागों के समन्वय एवं संवाद की आवश्यकता पर भी विचार विचार व्यक्त किए। हिन्दी-विभाग से डॉ. सत्यपाल सहगल ने व्याख्यान पर समापन टिप्पणी दी।
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