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सिटी रिपोर्टर

6 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर

“मोहब्बतके लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। मोहब्बत करने का हक सभी को है। यह महीना वैसे भी मोहब्बत करने वालों का है। इस बार वैलेंटाइन डे पर किसी को गुलाब नहीं बल्कि किताब भेंट करें। गुलाब तो फिर भी मुरझा जाते हैं लेकिन किताब एक ऐसा तोहफा है जो कभी मुरझाता नहीं।’ ये बातें मंगलवार को प्रसिद्ध गीतकार इरशाद कामिल ने स्टूडेंट्स से साझी की। इस मौके पर उन्होंने हाल ही में प्रकाशित अपनी किताब एक महीना नज्मों का, से अपनी कुछ चुनींदा नज्में भी सुनाईं। पंजाब यूनिवर्सिटी के एल्युमनी रिलेशन्स डिपार्टमेंट और चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के सहयोग से गोल्डन जुबली हॉल में आयोजित इंटरेक्टिव सेशन में स्टूडेंट्स ने प्रेम और लेखन के विषय में कई सवाल भी पूछे। जिनका इरशाद कामिल ने बेबाकी से जवाब दिया।

नज्मोंपर खूब बजीं तालियां: सेशनमें फिल्म रॉक स्टार, आशिकी-2, जब वी मेट, चमेली, लव आजतक और रांझणा जैसी सुपरहिट फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार डॉ. इरशाद कामिल ने अपनी नई किताब से कुछ चुनींदा नज्में सुनाईं तो सारा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से बार-बार गूंजा। उन्होंने बताया कि उनकी सभी नज्में हर वर्ग के लिए हैं। इस पुस्तक को पढ़ने पर हर व्यक्ति को लगेगा कि इनमें से कुछ कुछ जैसे उन्हीं के लिए ही लिखा गया हो। इस मौके पर इरशाद ने पड़ोस की छत पर, मुंडेर, मैं तो अगला मोड़ हूं, एक बूंद तन्हाई, ख्वाहिश आदि रचनाएं सुनाईं।

जैदकाकी चार लाइनें: चंडीगढ़साहित्य अकादमी की चेयरपर्सन मंजू जैदका ने भी इरशाद की किताब की एक नज्म की चार लाइनें मैं तो अगला मोड़ हूं, इस राह में फिर आऊंगा, तेरे दिल की सूनी सी, दरगाह में फिर आऊंगा....सुनाईं जिनका उन्होंने अंग्रेजी में खुद अनुवाद करके भी सुनाया।

वीसी ने किया सम्मानित

कार्यक्रममें विवि के पुराने छात्र रहे इरशाद कामिल को वीसी प्रो. अरुण कुमार ने सम्मानित भी किया। इस सम्मान के लिए इरशाद ने विवि प्रशासन का आभार प्रकट कर किया और बार बार आने की तमन्ना जताई।

dil ki baatein पीयूमें आयोजित दिल की बात, इरशाद कामिल के साथ कार्यक्रम में गीतकार इरशाद कामिल ने करवाया अपनी रचनाओं से रू-ब-रू

वैलेंटाइन डे पर इस बार गुलाब नहीं किताब दें