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पंजाब को फायदा, चंडीगढ़ की परवाह नहीं

7 वर्ष पहले
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भास्कर डिबेट के तहत हम अपने पाठकों के लिए हर सोमवार लाते हैं शहर और देश से जुड़ा कोई मुद्दा और सोश्यो-इकोनॉमिक चेंज से जुड़े पहलू। डिबेट में दैनिक भास्कर कार्यालय बुलाए जाते हैं शहर के जाने-माने लोग, जो शहर के मसलों को भली-भांति समझते हैं और समस्याओं के हल भी तलाशे जाते हैं। इसी के अंश हम पेश करते हैं, पाठकों के लिए।

नरेश कोहली, इम्प्लॉइजलीडर

भला नहीं कर सकते तो बुरा करें

राजिंद्र भाटिया, सुपरिंटेंडेंटग्रेड टू हाइकोर्ट

एसएस लांबा, सीनियरसिटीजन

त्रिलोचन सिंह, प्रेसिडेंटप्रोग्रेसिव सोसायटी

हम चंडीगढ़ में नौकरी पेशा और दूसरे लोगों को अपने फ्लैट के लिए तरसना पड़ रहा है, लेकिन बाहर से आकर शहर की जमीन पर कब्जा करने वालों को फ्लैट बनाकर दिए गए। गवर्नमेंट इम्प्लाॅइज को उम्मीद थी कि उन्हें मकान मिलेंगे। लेकिन अब हालत ये हो गई है कि हम तो कहीं बाहर जमीन या फ्लैट ले सकते अौर ही यहां पर मकान मिल रहे हैं। अब सेक्टर 50 जैसी सोसायटी बना दी गई लेकिन मार्केट है और ही कोई दूसरी सुविधा। प्रशासक ने ऐसा कोई काम नहीं किए जो उन्हें यहां रहने दें।

कमल गुप्ता, चेयरमैनहाउसिंग सोसायटी रेजिडंेट

प्रशासक लगातार लोगों के जज्बातों के साथ खेलते रहे हैं। प्रशासक को ये समझने की जरूरत है, कि चंडीगढ़ में घर किराएदार से लेकर मकान मालिक तक की जरूरत है। किराएदार अपने लिए मकान ढूंढ रहे हैं, क्योंकि उन्हें भी रिटायरमेंट या एक उम्र के बाद अपना मकान चाहिए। मकान मालिकों के परिवार भी बढ़ रहे हैं तो उनके लिए अगर प्लाॅट नहीं तो नए फ्लैट तो चाहिए। चंडीगढ़ के लोगों के लिए बनने वाले नए फ्लैट को कैंसिल करने का फैसला गलत है। अगर हाउसिंग बोर्ड फ्लैट बनाकर दे रहा है तो वो भी कोई एहसास नही कर रहा।

चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने शहर के लोगों के लिए जनरल हाउसिंग स्कीम शुरू करने की तैयारी कर ली थी लेकिन जैसे ही इस स्कीम को प्रशासक शिवराज पाटिल की मंजूरी के लिए भेजा गया तो उन्होंने फौरन इस स्कीम को रद‌्द कर दिया। प्रशासक का ऐसा मनमाना रवैया गलत है। प्रशासक जब से आए हैं चंडीगढ़ को कुछ नहीं दिया। वे अगर शहर का भला नहीं कर सकते ताे वापस चले जाएं। यह कहना था भास्कर के मंच पर जुटे शहर के इम्प्लॉइज और रेजिडेंंट्स का। इम्प्लॉइज का कहना है कि इम्प्लॉइज हाउसिंग स्कीम के लिए अभी तक प्रशासन जमीन नही ढूंढ पाया। अब प्रशासक ने