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एसडीएम की जांच में फंसने वालों को बचा रही पुलिस
{धोखाधड़ी के चार आरोपी, दो को थाना-34 ने बचाया
{डीसी के आदेश पर हुआ केस दर्ज, अब तक चार्जशीट नहीं
एसडीएम ने रिपोर्ट में लिखा- ये बड़ी धांधली है
जांचमें एसडीएम ने पाया कि बिना किसी विशेष कारण के सोसायटी के अकाउंट से लाखों की रकम निकाली गई। मित्तल ने जांच रिपोर्ट में कहा- इसमें पैसों की गड़बड़ हुई है। कुछ रिकॉर्ड मिसिंग है, मेजरमेंट बुक को पेश नहीं किया गया। यह बड़ी धांधली है। इंक्वायरी में एसडीएम ने सोसायटी के प्रधान सेक्टर-51 के सलविंदर सिंह, एग्जीक्यूटिव मेबर गांव बुटेरला के सुरिंदर सिंह, सेक्टर-8 के बिल्डर सुरिंदर सिंह और इसी सेक्टर के आर्किटेक्ट लखबीर सिंह को दोषी करार देते हुए इन पर कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए। थाना-34 पुलिस ने सिर्फ बुटेरला के सुरिंदर सिंह और प्रधान सलविंदर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। बिल्डर सुरिंदर सिंह और आर्किटेक्ट लखबीर सिंह को केस से निकाल दिया। इसके बाद डीसी ने एसएसपी को चिट्ठी लिखकर कारण पूछा कि दोनों आरोपियों पर मेहरबानी क्यों की गई। सलविंदर का सेक्टर-37 में मशहूर फोटो स्टूडियो है। सुरिंदर सिंह का इसी मार्केट में टेंट हाउस था, जिनकी मौत हो चुकी है।
संजीव महाजन | चंडीगढ़ s.mahajan@dbcorp.in
एसडीएमकशिश मित्तल की जांच में सेक्टर-51 की जिस कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी का प्रबंधन लाखों की हेराफेरी में पकड़ा गया, उसी को बचाने के लिए थाना-34 पुलिस ने पूरा जोर लगा दिया है। इसको देखकर खुद डीसी मोहम्मद शाईन भी हैरान हैं। पहले तो डीसी ने केस दर्ज करने का फरमान दिया, तो पुलिस ने डीसी मोहम्मद शाईन को शिकायतकर्ता ही नहीं बनाया।
इसके बाद डीसी ने एसएसपी सुखचैन सिंह गिल को चिट्ठी लिखी, जिसमें कहा कि कशिश मित्तल की जांच में सेक्टर-8 की सुरिंदरा बिल्डर्स फर्म के मालिक सुरिंदर सिंह और मशहूर आर्किटेक्ट लखबीर सिंह को आरोपी बनाया था। जबकि पुलिस ने एफआईआर में दोनों को निकाल दिया, इसलिए उन पर भी केस दर्ज हो। इसके बाद पुलिस ने दोनों का नाम एफआईआर में शामिल किया। लेकिन केस दर्ज होने के चार महीनों के बाद भी पुलिस ने तो चार्जशीट दायर की, किसी आरोपी को गिरफ्तार किया।
सबूत तलाश रहे हैं
^अफसरोंके निर्देशों के बाद दोनों को आरोपी बना दिया गया था। अब हम इंटर्नल जांच अलग से कर रहे हैं। सबूत मिलते ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और कोर्ट में चार्जशीट पेश की जाएगी। -बलदेवसिंह, जांच अधिकारी
जाने पुलिस कार्रवाई से क्यों कतरा रही
^हमारीजांच में जो दो मुख्य आरोपी थे, उन पर पुलिस ने केस ही दर्ज नहीं किया। मैंने इसकी वजह पूछी तो तो एक महीने बाद उन्हें आरोपी बनाया। एक आईएएस अफसर ने पूरी जांच कर रिपोर्ट पुलिस को दी फिर भी 4 महीने बाद भी किसी को गिरफ्तार किया, ही चार्जशीट दायर की। अब एसएसपी को दोबारा लिख रहा हूं कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट क्यों दायर नहीं कर रही। -मोहम्मदशाईन, डीसी
दरअसल सेक्टर-51 के निवासी परगट सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि आरोपियों ने सोसायटी फंड में फर्जी बिलों के आधार पर लाखों की हेराफेरी की है। आरोपी अपने प्रभाव के चलते मामला दबाए बैठे हैं और प्रशासन इसकी जांच नहीं कर रहा। हाईकोर्ट ने डीसी मोहम्मद शाईन को आदेश जारी कर कहा था कि जांच करवाकर रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी जाए। इस पर डीसी ने पूरी जांच का जिम्मा एसडीएम कशिश मित्तल को दिया था। 5 मई को कशिश मित्तल ने जांच शुरू की थी। उन्होंने जांच के दौरान पुलिस को साथ लेकर कई बार सोसायटी का रिकॉर्ड खंगाला। कई बार सोसायटी के खर्चे की मेजरमेंट बुक मांगी लेकिन उन्हें ये नहीं दी गई। हर बार आरोपियों ने कहा कि उन्होंने मेजरमेंट बुक कभी बनाई और ही कभी उसे मेंटेन किया।