महागठबंधन की गंेद अब बसपा के पाले में
हरियाणामेंबसपा के साथ महागठबंधन बनाने के प्रयासों में एक बार फिर तेजी आई है। बसपा के सीएम प्रत्याशी डॉ. अरविंद शर्मा की पहल पर हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) और जन चेतना पार्टी गठबंधन दलित, पिछड़े और ब्राह्मणों के लिए 20-20 प्रतिशत सीटें छोड़ने को तैयार हो गया है। हजकां के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई और जनचेतना पार्टी के अध्यक्ष विनोद शर्मा ने सोमवार को जारी अपने संयुक्त बयान में बसपा को यह प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि हमारा गठबंधन ब्राह्मण, दलित और पिछड़ों को 20-20 प्रतिशत सीटें देने का निर्णय पहले से ही ले चुका है। गठबंधन के तहत शेष बची 40 फीसदी टिकटें समाज के अन्य वर्गों को दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि बसपा नेता अरविंद शर्मा के सार्वजनिक बयान से जाहिर हो गया है कि हम समान विचारधारा वाले राजनीतिक दल हैं। इसलिए तीनों दलों को गठबंधन करके भय, भ्रष्टाचार और भेदभाव को बढ़ावा देने वाली ताकतों को सत्ता से बाहर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि टिकटों में महिलाओं, युवाओं, ईमानदार, साफ-सुथरी छवि जमीन से जुड़े नेताओं को वरीयता दी जाएगी।
भाजपा का साथ छोड़ने के बाद हजकां खुद को अलग-थलग समझ रही थी। इसीलिए हजकां प्रमुख कुलदीप शर्मा ने पिछली बार उनके 5 विधायक तोड़ने वाले पूर्व मंत्री विनोद शर्मा से हाथ मिलाया। दरअसल हजकां और जेसीपी गठबंधन का प्रयास है कि कम से कम इतनी सीटें जाएं जिससे वे सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकें। इसीलिए वे बसपा को भी साथ लेना चाहते हैं। बसपा का दलित और पिछड़ों में कुछ निश्चित वोट बैंक है।
...हुआतो असर क्या?
हजकांऔर जेसीपी विधानसभा चुनाव के इस समर में बसपा को साथ लेकर नॉन जाट वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। नॉन वोट बैंक जितना बंटेगा, भाजपा को उतना ज्यादा नुकसान होगा। इसीलिए भाजपा ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए टिकटों में जाट समुदाय को महत्व देकर इस नुकसान को कम करने और नॉन जाट की ही पार्टी होने की छवि तोड़ने की कोशिश की है। इधर, कांग्रेस भी चाहती है कि ये तीनों मिलकर जितने भी वोट लेंगे, उससे कांग्रेस का फायदा ही होगा। इसकी वजह यह है कि कांग्रेस को परंपरागत वोट बैंक के साथ-साथ सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ जुड़ा जाट वोट भी मिलेगा। ऐसी स्थिति में हो सकता है कांग्रेस इन्हीं तीनों दलों का साथ लेकर सरकार बनाने की स्थिति में जाए।
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