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एएन-32 हादसा : 45 से 50 साल तक होती है एएन-32 प्लेन की लाइफ

7 वर्ष पहले
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(इंडियन एयरफोर्स के कार्गो प्लेन एएन-32 में शनिवार रात 8.30 बजे चंडीगढ़ के टेक्निकल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के वक्त आग लग गई थी। रविवार को टेक्निकल टीम जांच के लिए पहुंची।)
चंडीगढ़. शनिवार को लैंडिंग के दौरान एएन-32 में आग लगने के कारणों का पता नहीं लग सका है। हालांकि इंडियन एयर फोर्स के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर जी गलवे का का कहना है कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ। उन्होंने बताया कि इन प्लेन्स की लाइफ 45-50 साल होती है। समय-समय पर इनकी मेंटेनेंस भी होती रहती है। जिस प्लेन में हादसा हुआ, वह रुटीन फ्लाइंग कर रहा था। ऑपरेशन से संबंधित सभी कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। उसके बाद ही हादसे के कारणों का पता चल पाएगा।
12 लोगों में यह हुए घायल:सार्जेंट बीवी गुलाटी, एसी अभिषेक गिरी, बीएसएफ कांस्टेबल डी कुमार, बीएसएफ काॅन्स्टेबल बीडी हेमरन, बीएसएफ कांस्टेबल बिजेंदर सिंह, बीएसएफ कांस्टेबल सुरेश कुमार, बीएसएफ कांस्टेबल राजू कुमार पाठक, एयरफोर्स के फ्लाइट लेफ्टिनेंट आर मलिक, विंग कमांडर मुनीष शर्मा, फ्लाइंग लेफ्टिनेंट विजय तिवारी, स्कवाडन लीर अक्षय, एलएसी पी कॉश शामिल हैं। कमांड हॉस्पिटल प्रबंधन के मुताबिक एलएसी पी कॉश को छोड़कर बाकी के 11 को मामूली चोटें हैं उनकी हालत सामान्य है।
क्यों खास है एएन-32: दोहरे इंजन वाला यह ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट विमान विपरीत मौसम में पहाड़ी इलाकों में भी कारगर तरीके से उड़ान भर सकता है। 2000 में नए एएन-32 विमान की कीमत 6 से 9 मिलियन डालर आंकी गई थी। यह विमान 4500 मीटर ऊंचे पहाड़ी इलाकों और 55 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी बेहतर परफार्मेंस देता है। भारतीय वायु सेना में यह मल्टीपर्पज एयरक्राफ्ट है, जो मिलिट्री ट्रांसपोर्ट के साथ साथ सिविल कमर्शियल फ्लाइंग के लिए भी प्रयोग हो सकता है। इसका प्रयोग एंबुलेंस, फायर फाइटर और पैराट्रुप की स्काई डाइविंग के लिए भी एयरफोर्स करती है। विश्व भर में इस समय विभिन्न देशों में 240 एएन-32 प्लेन प्रयोग हो रहे है।
एएन-32 के अब तक के बड़े हादसे
25 मार्च 1986 को इंडियन एयरफोर्स का एएन 32 प्लेन इंडियन ओसन के उपर उड़ान भरते समय गायब हो गया था। यह प्लेन सोवियत यूनियन से आ रहा था। इस प्लेन का और इसमें सवार तीन क्रू मैंबर्स और चार पैसेंजर का कुछ पता नहीं चला।
8 जनवरी 1996 को एक एएन-32 डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगों के किंशासा में भीड़ भरे मार्केट प्लेस में क्रेश हुआ। इससे 237 लोगों की मौत हो गई। इस प्लेन के छह क्रू मेंबर्स ने इससे कुछ कर जान बचाई।
28 मार्च 1998 को एक पेरुवियन एयरफोर्स का एएन-32 बाढ़ पीड़ितों को लेकर आ रहा था। ओवरलोड होने से प्लेन तीन घरों पर आ गिरा। इसके 5 क्रू मेंबर्स बच गए, इसमें सवार 21 पैसेंजर की मौत हो गई।
10 जून 2009 को इंडियन एयरफोर्स का एएन 32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट 13 लोगों को ले जाते हुए क्रैश हो गया। भारत ने यूक्रेन के साथ एएन-32 को अपग्रेड करने के लिए 400 मिलियन डालर की डील की।
एक्सपर्ट राय:एयर मार्शल रिटायर्ड रणधीर सिंह
जब प्लेन लैंड कर रहा था, उस समय उसकी स्पीड कुछ ज्यादा कम हो गई होगी। जिसके चलते वह रनवे पर तेजी से टच हुआ और फिर ऊपर की ओर उठा। पायलट का संतुलन बिगड़ गया होगा। प्लेन जिस दिशा में झुका होगा उस दिशा के व्हील पर पूरे प्लेन का वजन आने से व्हील टूट गया होगा और प्लेन पलट गया होगा और उसमें आग लग गई होगी। जहां तक एयरफोर्स पायलेट्स पिछले 15 दिन से जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ की वजह से थके हुए हैं। वे 24 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं।
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फोटो अनिल ठाकुर