चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में लोकल बॉडी चुनाव में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया है। इस फैसले से विरोध के स्वर उठ खड़े हुए हैं। पार्टी काडर में इस बात को लेकर हैरानी है कि इतना बड़ा फैसला आखिर पार्टी ने क्यों लिया? जबकि यह एक बड़ा मौका था जब आम आदमी पार्टी नगर पंचायतों से लेकर बड़े महानगरों तक हर बूथ पर अपनी पैठ बना सकती थी। वजह, आप सांसद सोशल ऑडिटिंग से डरे हुए हैं। उनके आठ महीने का कार्यकाल ही चुनाव लड़ने से कदम रोक रहा है।
बता दें कि दिल्ली में नगर निगम और पालिकाओं के चुनाव को लेकर हुई मीटिंग में आप के पंजाब संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर इस बात के हामी थे कि चुनाव लड़ना चाहिए। लेकिन, पता चला है कि उन्हें बता दिया गया कि पार्टी के चारों सांसद ये नहीं चाहते। इस बात की पुष्टि पार्टी के सीनियर नेता ने भी की है। लेकिन, अपना नाम छपवाने से साफ मना कर दिया।
मैदान छोड़ने की क्या वजह: साल 2013 में दिल्ली में सरकार बनाने के बाद पार्टी को पंजाब में बड़ा रिस्पाॅन्स मिला। पंजाब की राजनीति में बदलाव चाहने वालों ने लोकसभा के चुनाव में पार्टी की झोली में चार सांसद डालकर साबित कर दिया कि यहां के लोग नई तरह की राजनीति चाहते हैं। पार्टी को उन संसदीय क्षेत्रों में भी भारी रिस्पाॅन्स मिला, जहां पार्टी के उम्मीदवारों को कोई जानता तक नहीं था। लुधियाना में आप दूसरे नंबर पर रही। आजाद उम्मीदवार सिमरजीत बैंस के कारण पार्टी उम्मीदवार एचएस फूलका बहुत कम मतों के अंतर से रवनीत सिंह बिट्टू से हार गए। कई नेता तो यहां तक कहते हैं कि संसदीय चुनाव में कई ऐसे गांव रहे जिनमें हमने पहुंच तक नहीं की। लेकिन, भारी वोट मिले। संसदीय चुनाव को बीते आठ महीने से ज्यादा हो गए हैं। लेकिन, पार्टी का बूथ लेवल पर स्ट्रक्चर तैयार ही नहीं हुआ है।
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