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एडवाइजर शर्मा का ट्रांसफर, अब होंगे गोवा के चीफ सेक्रेटरी

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स ने चंडीगढ़ के एडवाइजर टु एडमिनिस्ट्रेटर केके शर्मा के ट्रांसफर ऑर्डर जारी कर दिए हैं। शर्मा प्रमोशन के साथ गोवा भेजे जा रहे हैं और वहां पर चीफ सेक्रेटरी की पोस्ट पर ज्वाइन करेंगे। पिछले काफी टाइम से शर्मा के ट्रांसफर की अटकलें लगाई जा रही थीं। शुक्रवार को मिनिस्ट्री की तरफ से ये निर्देश जारी कर दिए गए। प्रशासन केके शर्मा को 30 सितंबर को रिलीव कर सकता है।
अप्रैल 2014 में खत्म हो गया था शर्मा का टेन्योर
केके शर्मा ने चंडीगढ़ में बतौर एडवाइजर 15 अप्रैल 2011 को ज्वाइन किया था। 15 अप्रैल 2014 को उनका चंडीगढ़ में डेपुटेशन टेन्योर खत्म हो चुका है। इस दौरान लोकसभा चुनावों के चलते उनके टेन्योर को एक्सटेंड कर दिया गया था।
विजय देव या रमेश नेगी हो सकते हैं अगले एडवाइजर
अगले एडवाइजर के नाम को मिनिस्ट्री ने अभी फाइनल नहीं किया है। हालांकि इस पोस्ट पर 1987 और 1984 बैच के दो आईएएस अफसरों के नाम आगे चल रहे हैं। दिल्ली के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर विजय कुमार देव (1987 बैच) यहां पर एडवाइजर के तौर पर आ सकते हैं। दूसरे दावेदार के नाम पर 1984 बैच के रमेश नेगी का नाम चल रहा है। नेगी इस वक्त अरुणाचल प्रदेश में डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कमिश्नर हैं।
यूटी कैडर को स्ट्रॉन्ग किया
पंजाब और हरियाणा के अफसरों के दबदबे के बीच शर्मा चंडीगढ़ में यूटी कैडर को मजबूत करने में सफल रहे। यूटी कैडर की न सिर्फ पोस्ट बढ़ी बल्कि सभी पावरफुल महकमों में इनकी तैनाती भी हुई। आज तीन एसडीएम, एडिशनल सेक्रेटरी टू होम, सीएचबी चेयरमैन, आईटी सेक्रेटरी, सीईओ सीएचबी की पोस्ट यूटी कैडर की हैं। दो अफसरों को ज्वाइन करना है।
ये प्रोजेक्ट अधूरे छोड़ गए
> मेट्रो रेल कागज से निकलकर हकीकत नहीं बन पाई।
> इंप्लाइज हाउसिंग-2008 के लिए जमीन फाइनल नहीं हो पाई।
> मिसयूज पेनल्टी 500 रुपए से कम करने को लेकर कुछ नहीं किया।
> इंडस्ट्रियल पॉलिसी फाइनल नहीं करा पाए।
> मोबाइल टावर पॉलिसी फ्रेम नहीं हो पाई।
> लाल डोरा के बाहर हुई कंस्ट्रक्शन के लोगों को कोई राहत नहीं दे पाए।
> प्रशासन में सभी काम ऑनलाइन करने पर कुछ खास नहीं कर पाए।
> किसी भी मेगा प्रोजेक्ट की डेवलपमेंट को लेकर कुछ नहीं हुआ।
> शहर के लिए कोई नई जनरल हाउसिंग स्कीम नहीं निकली।
> ट्रांसपोर्टेशन में भी कुछ खास नहीं हुआ।

ये काम हुए

> मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार कर मिनिस्ट्री को भेजा, लेकिन काफी लेट।
> जेएनएनयूआरएम के तहत 170 बसों का कॉन्ट्रैक्ट एसएमएल कंपनी को दिया गया।
> संपर्क सेंटर्स के साथ कई प्रशासनिक सर्विसेज को जोड़ा गया।