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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. जिस पंछी के वास्ते पेड़ बने भगवान, पिंजरे में रखकर उसे प्यार करे इंसान। साल भर हो गया गुजरे हुए छम्मों को मगर.... छ: महीने में ऐसा हाल किया बीवी ने....जैसे शेर पर कभी हंसे, तो कभी संजीदा हो उठे लोग। मौका था मंगलवार शाम टैगोर थिएटर में ऑर्गनाइज जश्न-ए-हरियाणा (ऑल इंडिया मुशायरा) का। इसमें देश के विभिन्न शहरों से 13 शायर और गज़लकार शामिल हुए।
इस मौके पर शायरों ने श्रृंगार, करंट पॉलिटिकल सिनारियो और सामाजिक व्यवस्था पर अपने शेर पेश किए। हास्य व्यंग्य रचनाकार पॉपुलर मेरठी के मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते..., ससुराल की कंजूसी...और पति पत्नी के ऊपर कसे व्यंग्यों पर लोग ठहाके लगाकर हंसे। यह ऐसा दौर था जब लोगों ने रचनाकार को तालियों से नहीं अपने ठहाकों से सराहा। निदा $फाजली के पॉलिटिक्स पर पढ़े शेर को लोगों ने खड़े होकर तालियों से नवाजा। वहीं श्रृंगारिक रचनाओं जैसे 'आज तो छत से नजर ही नहीं आया सूरज...Ó पर लोगों ने खूब तालियां बजाई। इस मौके पर चीफ सेक्रेटरी हरियाणा एस.सी. चौधरी सहित कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी मौजूद रहे।
शामिल शायरों की सूची: निदा $फाज़ली, पॉपुलर मेरठी, डॉ. नसीम निकहत, खुर्रम कय्यूमी, डॉ. जिया टोंकी, डॉ. हक कानपुरी, सविता असीम, अना देहलवी, कशिश वारसी, नईम राशिद, मुईन शादाब, कय्यूम बिस्मिल और शम्स तबरेजी।
एक बार फिर से: मुशायरा के दौरान कई मौके ऐसे आए। जब ऑडियंस की फरमाइश पर शायरों को एक शेर तीन-तीन बार पढऩा पड़ा। इनमें अब किसी और के हाथों का मुकद्दर हूं..., नक्शा लेकर हाथ में बच्चा है हैरान..., जैसे शेर शामिल हैं।
चुनिंदा शायरी
बच्चा बोला देखकर मस्जिद आलीशान,
अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान।
सीधा साधा डाकिया जादू करे महान,
एक ही थैले में भरे आंसू और मुस्कान।
निदा फाज़ली
फूल रंग के तितली के हवाले कर दूं,
गालिब और मीर को तुलसी के हवाले कर दूं,
आज आपस में मिला दूं सगी बहनों को,
यानी उर्दू को हिंदी के हवाले कर दूं।
अना देहलवी
घर के कुछ काम है,
सो दिल्ली की तैयारी है,
कार दफ्तर की है,
और टूर भी सरकारी है,
जिसको दो वक्त की,
रोटी मयस्सर नहीं शम्स,
जिंदगी उसके लिए एड्स की बीमारी है।
शम्स तबरेजी
अब ना वो लड़कपन,
अब ना वो जवानी है,
वो अलग कहानी थी,
ये अलग कहानी है।
डॉ. नसीम निकहत
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