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फ्रेंडली किडनी डोनेशन की अप्रूवल पीजीआई में ही, आसानी से कर सकेंगे किडनी डोनेट

6 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। पीजीआई ने किडनी पेशेंट्स के लिए राहत भरा फैसला लिया है। इसके तहत ब्लड रिलेशन से बाहर वाले भी आसानी से किडनी डोनेट कर सकेंगे। राज्य सरकार के पैनल से अप्रूवल लेने के लंबे प्रोसेस से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पीजीआई ने इसके लिए अपने स्तर पर ही एक अप्रूवल कमेटी बनाई है, जो यह तय करेगी कि ब्लड रिलेशन से बाहर का डोनर सही मंशा से किडनी दे रहा है या नहीं। इस कमेटी में पांच डॉक्टर हैं। डॉक्टर समय-समय पर बदलते रहेंगे।

पीजीआई प्रवक्ता मंजू वडवलकर का कहना है कि इस प्रोसेस से मरीजों को बाहर से मंजूरी लेने के लंबे प्रोसेस की जरूरत नहीं पड़ेगी, समय बचेगा। मरीज को अगर ब्लड रिलेशन में डोनर नहीं मिलता तो उस मरीज का कोई संबंधी या दोस्त पीजीआई की अप्रूवल कमेटी के पास किडनी डोनेट करने के लिए आवेदन कर सकता है। ये कमेटी फौरन मीटिंग बुलाकर फैसला करेगी कि डोनर सही है या नहीं।
बचेंगे कम से कम 6 महीने
अभी राज्यों की ऑथराइजेशन कमेटी से लेनी पड़ती है मंजूरी
किडनी खराब है और ब्लड रिलेशन में मैच नहीं तो मुश्किल बढ़ जाती है। ऐसे में दोस्त, दूर का रिश्तेदार या कोई परिचित किडनी देने को तैयार भी हो जाए तो भी राज्य सरकार की ओर से गठित ऑथराइजेशन कमेटी के पास मंजूरी के लिए आवेदन करना पड़ता है।
इसलिए कड़े हैं नियम: दरअसल देश भर में पैसे लेकर किडनी डोनेशन के मामले सामने आने के बाद राज्य सरकारों ने इस तरह के कदम उठाए हैं।
डोनर होने पर भी औसतन

छह महीने का इंतजार
पीजीआई नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड रहे और अब मैक्स सुपर स्पेश्लिटी हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर प्रो. विनय सखूजा कहते हैं- डोनर फौरन मिल जाए तो भी किडनी ट्रांसप्लांट में औसतन 6 महीने से साल भर तक लग जाता है। मरीज और डोनर दोनों के टेस्ट करवाने में समय लगता है। ब्लड रिलेशन में डोनर नहीं है तो ब्रेन डेड पेशेंट का ही इंतजार करना पड़ता है। दूसरे डोनर को राज्य सरकारों की कमेटी की मंजूरी लेनी पड़ती है जो लंबा प्रोसेस है।
नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में करें एप्लाई
अगर ब्लड ग्रुप में डोनर नहीं मिलता लेकिन कोई रिश्तेदार या फ्रेंड किडनी डोनेट करना चाहता है तो पीजीआई नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड से मिलें। इसी डिपार्टमेंट में एप्लीकेशन फॉर्म जमा कराना होगा। फॉर्म अप्रूवल कमेटी के पास पहुंचेगा। कमेटी डोनर को बुलाकर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करेगी।
अब पीजीआई में ही मिलेगी अप्रूवल
डोनर को पीजीआई की कमेटी के सामने ही अपना दावा पेश करना होगा। मरीज के साथ संबंध साबित करने होंगे।
{पीजीआई के पांच डॉक्टरों की कमेटी देगी अप्रूवल
{डॉक्टरों के नामों का खुलासा पहले नहीं किया जाएगा
{समय-समय पर बदलेंगे डॉक्टर ताकि कोई इन्फ्लुएंस न कर सके
{डोनर किसी भी राज्य का हो, पीजीआई की कमेटी ही देगी मंजूरी
डोनर ब्लड रिलेशन में, फिर भी 55 को सर्जरी का इंतजार | पीजीआई में डोनर होने के बाद भी 55 मरीजों को ट्रांसप्लांट का इंतजार है। पहले कई टेस्ट्स होते हैं। कई टेस्ट ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट 20-25 दिन लगते हैं।
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