जीरकपुर. छतबीड़ जू में शुद्ध एशियन नस्ल के एकमात्र एशियाई शेर अभय की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शेड्यूल वन के इस शेर की मौत के पीछे जू प्रबंधकों विशेषकर वेटरनरी स्टाफ की लापरवाही को कारण माना जा रहा है। पांच साल का अभय ढाई महीने पहले ही चार शावकों का पिता बना था। अभय की मौत के साथ ही जू में लायन सफारी को दर्शकों के लिए फिलहाल बंद कर दिया गया है। 25 जून 2013 को दिल्ली जू से अभय को ब्रीडिंग लोन पर छतबीड़ जू लाया गया था। प्रबंधकों को भी जवाब देना होगा कि अभय को हफ्ताभर हाउस से बाहर जंगलों में क्यों रहने दिया गयाω। इस हादसे के बाद से जू प्रबंधक कुछ भी बताने से गुरेज कर रहे हैं। जू के फील्ड डायरेक्टर मुनीष कुमार ने पहले फोन नहीं उठाया। बाद में उनका फोन आउट ऑफ रीच रहा, जबकि जूनियर स्टाफ ने तो फोन ही बंद कर दिया।
ट्रैंकुलाइज करने के बाद होश में नहीं आया अभय
जू सूत्रों के अनुसार अभय हफ्तेभर से अपने हाउस में नहीं लौटा था और सफारी में ही था। वीरवार को जू प्रबंधक उसे जबरन पिंजरे में बंद कर हाउस में लाए। इसके लिए उसे ट्रैंकुलाइज गन से बेहोशी के इंजेक्शन दिए गए। हाउस में रात-दिन करीब तीन दर्जन ग्लूकोज की बोतलें चढ़ाकर उसका इलाज किया जा रहा था पर वह दोबारा होश में नहीं आ सका। शनिवार को करीब सात बजे अभय ने दम तोड़ दिया। शनिवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद अभय के शव को जू में जला दिया गया।
मीट की क्वालिटी की जांच
क्या अभय ट्रैंकुलाइजर ओवरडोज का शिकार हुआ, वेटरनरी इलाज में लापरवाही बरती गई या घटिया मीट सप्लाई मौत का कारण बनी? इन तथ्यों की जांच जारी है। जू में सप्लाई हुए मीट की क्वालिटी को लेकर शिकायतें बढ़ रही थीं। मछली भी कटी हुई सप्लाई हो रही थी। शुक्रवार को अभय की तबीयत बिगड़ने पर लुधियाना की गुरु अंगद देव वेटरनरी युनिवर्सिटी से डॉक्टर जू पहुंचे थे। उन्होंने मीट की भी जांच की थी।
जेनेटिक डिसऑर्डर से निजात दिलाई थी अभय ने
अभय की बदौलत 12 साल बाद जू में शुद्ध एशियाई शेरों की वंशवृद्धि देखने को मिली थी। अभय और हेली की मेटिंग से 4 जुलाई को चार शावक पैदा हुए थे। डेढ़ दशक पहले इनब्रीडिंग के चलते लायन सफारी के 100 से ज्यादा शेर जेनेटिक डिसऑर्डर का शिकार हो गए थे। लूले, लंगड़े ये शेर समय से पहले ही मौत के मुंह में समाते गए। 1996 से इन शेरों की नसबंदी शुरू की गई ताकि जेनेटिक डिसऑर्डर पर रोक लग सके। 2002 के बाद किसी शेरनी ने यहां शावक नहीं जन्मे थे।
सफारी में शेरों के दर्शन से महरूम हुए पर्यटक
अभय की मौत के बाद लायन सफारी में अब चार शावकों समेत केवल छह शेर रह गए हैं। इनमें से हेली और उसके चार बच्चों को फिलहाल हाउस में रखा गया है, जहां सीसीटीवी से मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं, उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके रॉकी को ऑफ डिस्पले रखा जा रहा है।