( पूर्व हॉकी प्लेयर बलबीर सिंह )
चंडीगढ़। भारत में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न देने के लिए आवाजे उठ रही हैं। भाजपा भी मेजर ध्यानचंद को भारत देने के पक्ष में रही है। लेकिन पंजाब सरकार के एक पत्र से हॉकी में तीन बार ओलंपिक गोल्ड जीत चुके पूर्व भारतीय कप्तान बलबीर सिंह सीनियर भी देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न की दौड़ में शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल ने सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर उनका नाम रेकमंड किया। पंजाब ओलंपिक एसोसिएशन ने बलबीर के नाम का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। पंजाब के हरिपुर खालसा (जालंधर) के मूल निवासी और काफी समय से चंडीगढ़ में रह रहे हैं। आजादी के बाद लगातार तीन ओलंपिक 1948, 1952 और 1956 में भारतीय टीम ने गोल्ड जीता। तीनों ही बार बलबीर टीम के सदस्य थे और 1956 में वे कप्तान थे। कुछ समय पहले बलबीर ने भी खुद को भारत रत्न का दावेदार बताया था ।
शानदार कोच रह चुके हैं बलबीर
कोच के तौर पर भी बलबीर सिंह सीनियर का नाम हॉकी इंडिया के लिए सुनहरे अक्षरों में लिखा हुआ है। 1975 के वर्ल्ड कप में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद बुलाकर उन्हें भारतीय टीम के कोच की जिम्मेदारी सौंपी थी। अपनी कोचिंग में उसी साल उन्होंने देश को वर्ल्ड कप दिलवा भी दिया। इसके बाद भारतीय टीम आज तक दोबारा वर्ल्ड कप नहीं जीत पाई। हॉकी स्किल्स पर उनकी एक बुक भी प्रकाशित हो चुकी है।
दुनिया के आल टाइम ओलंपियंस में अकेले हॉकी प्लेयर
2012 में लंदन ओलंपिक में इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने शुरुआत से लेकर 2012 तक ऑलटाइम 16 (8 मेंस और 8 वुमन) फेवरेट ओलंपियंस चुने। बलबीर सिंह सीनियर दुनिया के एकमात्र हॉकी प्लेयर थे जिन्हें इसमें शामिल किया गया।
गिनीज बुक में दर्ज है नाम
हॉकी के जादूगर नाम से मशहूर ध्यानचंद भारत रत्न के लिए आगे हैं लेकिन रिकॉर्ड और अचीवमेंट में बलबीर ने उन्हें भी पीछे छोड़ दिया है। 1952 ओलंपिक के फाइनल में उन्होंने पांच गोल दागे थे। इस रिकॉर्ड को आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। इसी के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। कहा जाता है कि उनके जैसा सेंटर फॉरवर्ड आज तक पैदा नहीं हुआ।
आगे की स्लाइड्स में देखिए बलबीर सिंह की कुछ चुनिंदा तस्वीरें...