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पार्किंग से कार चोरी होते ही पीजीआई कहने लगा हमारा कर्मी नहीं

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. जय भगवान शर्मा, उम्र 56 साल। पीजीआई के डाइटिक्स डिपार्टमेंट में जूनियर स्टोर ऑफिसर हैं, दो साल बाद रिटायर हो जाएंगे। समस्या यह है कि पीजीआई इन दिनों इन्हें अपना कर्मचारी ही नहीं मान रहा है।
इसकी वजह है पीजीआई स्टाफ पार्किग से शर्मा की कार चोरी होना। शर्मा ने इसके एवज में मुआवजा मांगा तो पीजीआई यह पैंतरा अपना रहा है। शर्मा ने मुआवजे के लिए कंज्यूमर कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने पीजीआई से इस बारे में जवाब मांगा तो संस्थान ने शर्मा को अपना कर्मचारी मानने से ही इंकार कर दिया।
जेबी शर्मा की मारुति कार जून 2010 को पीजीआई की स्टाफ पार्किग से चोरी हो गई थी। चोरी की शिकायत पीजीआई के सिक्योरिटी ऑफिसर के माध्यम से पुलिस को भी दी गई। शर्मा ने पीजीआई इस्टेट ऑफिसर को शिकायत दी तो पार्किग के ठेकेदार से भी जवाब मांगा गया। लेकिन ठेकेदार का जवाब आज तक नहीं आया। इस बीच कॉन्ट्रैक्ट पीरियड पूरा हुआ और ठेकेदार चलता बना।
पुलिस भी दो साल तक कार को ट्रेस नहीं कर पाई। इसके बाद शर्मा मुआवजे के लिए कंज्यूमर कोर्ट गए। कोर्ट से पीजीआई और पार्किग ठेकेदार को नोटिस भी जारी हुए। कंज्यूमर कोर्ट में पीजीआई के इस्टेट ऑफिसर-1 के एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर निरंजन सिंह शर्मा ने जवाब दिया कि जेबी शर्मा पीजीआई के कर्मचारी ही नहीं हैं।
खुद ढूंढना पड़ा ठेकेदार
गाड़ी चोरी होने के बाद पार्किग ठेकेदार पीजीआई से चला गया। शर्मा ने पीजीआई से ठेकेदार का पता मांगा तो वो भी नहीं दिया गया। कंज्यूमर कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए जेबी शर्मा ने ठेकेदार का पता खुद ढूंढ़कर याचिका दायर की।
नियमों के तहत मिलना चाहिए मुआवजा
पीजीआई में पार्किग का ठेका लेने वाले कॉन्ट्रैक्टर से सिक्योरिटी राशि ली जाती है। इस दौरान अगर पार्किग से किसी भी स्टाफ मेंबर या बाहर से आने वाले का वाहन चोरी होता है तो सिक्योरिटी राशि से पैसा काटकर मुआवजा दिलाने की जिम्मेदारी पीजीआई की है।
और भी हैं भुक्तभोगी
न मुआवजा मिला, न ठेकेदार पर कोई कार्रवाई हुई
गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी के डॉ सुरेंद्र कुमार शर्मा की बाइक दिसंबर 2012 में निवेदिता हॉस्टल की पार्किग से चोरी हो गई। डॉ. शर्मा ने पुलिस, पीजीआई सिक्योरिटी ऑफिसर को शिकायत दी। जांच से पता चला कि पार्किग ठेकेदार के कारिंदे की लापरवाही से बाइक चोरी हुई है। सिक्योरिटी ऑफिसर ने ठेकेदार को मुआवजा देने को कहा, लेकिन डॉ. शर्मा को मुआवजा नहीं मिला है।
17 चिट्ठियां भी न दिला सकीं मुआवजा
पीजीआई में मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट अजय अत्री की नई बाइक 2011 में पीजीआई में लाइब्रेरी के सामने स्टाफ पार्किग से चोरी हुई। पार्किग ठेकेदार ने कोई जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया। मुआवजे के लिए पिछले 2 साल में अत्री पीजीआई सिक्योरिटी ऑफिसर से लेकर अन्य अफसरों को 17 बार चिट्ठी लिख चुके हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कुछ नहीं हुआ।
पीजीआई से संबंधित किसी भी लीगल केस में रिप्लाई राय लेने के बाद या तो खुद या फिर वकील द्वारा दिया जाता है। संबंधित अधिकारी से जानकारी लेकर ही कुछ कहा जा सकता है। -मंजू वडवलकर, पीजीआई प्रवक्ता