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स्कूलों में नैतिकता आधारित विषय पढ़ाएगा सीबीएसई

9 वर्ष पहले
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अनिल बंसल, सोनीपत

सीबीएसई ने नैतिकता आधारित विषयों को अपने सिलेबस में लाने के लिए की गई घोषणा पर अमल शुरू कर दिया है। आगामी शैक्षणिक सत्र से ह्यूमन राइट्स और जेंडर इक्वेलिटी को नए विषय के रूप में लागू कर दिया है। हाल ही में सोनीपत दौरे पर आए सीबीएसई के चेयरमैन विनीत जोशी ने भास्कर के साथ चर्चा में नैतिकता पर आधारित विषयों को सिलेबस का हिस्सा बनाने की बात कही थी।


उसी के तहत आगामी शैक्षणिक सत्र से 11वीं व 12वीं के विद्यार्थी ह्यूमन राइट्स को भी समझेंगे। साथ ही जेंडर इक्वेलिटी के प्रति अपने अज्ञान को दूर करेंगे। हालांकि शुरुआत में दोनों को इलेक्टिव सब्जेक्ट्स के रूप में शामिल किया गया है।
मानवाधिकार के मुद्दे पर बेहद कम ज्ञान को लेकर कई मसलों पर यह देखा गया है विद्यार्थियों को इनके बारे में जानकारी बेहद कम है। कभी किसी स्कूल में कोई सेमिनार आयोजित हो गया तब भी चुनिंदा लोगों तक ही यह जानकारी पहुंचती थी। इस स्थिति को देखते हुए नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी स्कूल कॅरिकुलम में ह्यूमन राइट्स एजुकेशन जोडऩे की सीबीएसई को सलाह थी।


खेल पत्रकारिता भी सीखेंगे

युवाओं में बढ़ते पत्रकारिता के प्रति जुनून को देखते हुए सीबीएसई ने पत्रकारिता को भी विषय के रूप में शामिल किया है। यही नहीं स्पेशलाइजेशन के दौर में खेल पत्रकारिता विषय लागू कर दिया है। इस स्थिति में जो विद्यार्थी पत्रकारिता की शुरुआती सीढिय़ां चढऩा चाहते हैं, वे इस विषय को ले सकते हैं।

सीबीएसई का रुख गंभीर


॥सामाजिक मुद्दों के प्रति सीबीएसई हमेशा से ही गंभीर रुख रहा है। इसी के मद्देनजर नए विषय लागू किए जा रहे हैं। वे खुद इन्हें लागू करने के पक्षधर रहे हैं। स्कूल में पत्रकारिता विषय भी लागू होगा। उम्मीद है कि इससे शिक्षा का स्तर भी मजबूत होगा।
वीके मित्तल, अध्यक्ष, सहोदय

॥सीबीएसई की ओर से यूं तो हर साल काफी विषय शामिल किए जाते हैं, चूंकि इससे ऑप्शनल सब्जेक्ट हैं तो कहीं ये भी विषयों की भीड़ का हिस्सा न बन जाए। बेहतर होता कि सीबीएसई इन्हें अनिवार्य विषय के रूप में लागू करती।
सोनी रूद्धा, प्रिंसिपल, हिंदू विद्यापीठ।


॥सीबीएसई की यह पहल सराहनीय है। हालांकि यहां सीबीएसई को चाहिए कि वे इसे शुरुआती कक्षाओं में भी लागू करें, जिससे शुरुआत से ही बच्चे अपने ज्ञान का दायरा आगे बढ़ा सकें।
शिखा बनर्जी, प्रिंसिपल गेटवे इंटरनेशनल स्कूल, सोनीपत।


लिंग समानता की परेशानी होगी खत्म: स्कूल चाहे कोएड हो या सेपरेट, दोनों में जेंडर इक्वेलिटी को लेकर कुछ न कुछ मुद्दे रहते हैं। बच्चों को स्कूल लेवल पर ही प्रॉपर तरीके से इंटरेक्शन, इक्वेलिटी व राइट्स के बारे में विषय ही वह माध्यम है, जो उनकी परेशानी दूर कर सकता है। हालांकि, ये ऑप्शनल सब्जेक्ट्स हैं, शुरुआत बढिय़ा रही तो अनिवार्य विषय के रूप में स्थान लेते इन्हें देर नहीं लगेगी।