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नियमों के विरुद्ध बदल दिया काडर

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़ । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में चहेते कर्मियों को प्रमोट करने के लिए मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएचडल्यू) का काडर बदलकर क्लर्क काडर करने का मामला सामने आया है, जबकि एमपीएचडल्यू टेक्निकल पोस्ट है और नियमों के अनुसार इस पोस्ट का काडर नहीं बदला जा सकता। यह नियमों का उल्लंघन है। मामले में पंजाब सिविल सर्विस रूल्स के सेक्शन 3.17 ए का दुरुपयोग भी सामने आया है। ऐसा करने से अन्य क्लर्क काडर के कर्मचारियों की सीनियोरिटी पर भी असर पड़ता है।

सेवा नियमों की गलत परिभाषा दी
वर्ष 2002 में पंजाब सिविल सर्विस रूल्स के सेक्शन 3.17ए के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के एमपीएचडल्यू सतीश कुमार, परमिंदर सिंह और बलविंदर सिंह का काडर बदलकर उन्हें क्लर्क काडर दे दिया गया, जबकि इस रूल के तहत किसी कर्मचारी को सजा देने के लिए उसके काडर में बदलाव किया जा सकता है,

लेकिन उक्त मामले में इस रूल का गलत इस्तेमाल किया गया और सरकार के सेवा नियमों की गलत परिभाषा दर्शाते हुए चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए उक्त कर्मचारियों के काडर में बदलाव कर दिया गया, जबकि यह बदलाव उन्हें किसी तरह की सजा देने के लिए नहीं किया गया है।

ऐसे में इन कर्मचारियों के काडर में बदलाव पंजाब सरकार के सेवा नियमों का सख्त उल्लंघन है और यह बदलाव उच्चाधिकारियों को गुमराह कर किया गया है। इतना ही नहीं, वर्ष 2013 में इन कर्मचारियों को आगे प्रमोशन देते हुए असिस्टेंट तक बना दिया गया और वे अभी तक इन्हीं पदों पर काम कर रहे हैं। अब मामला सामने आने के बाद अफसरों पर इन कर्मचारियों को रिवर्ट करने का दबाव बढ़ गया है।

ऐसे ही अन्य केस में कर्मचारी हो चुके हैं रिवर्ट
ऐसे ही एक अन्य मामले में 18 मार्च 1998 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में कम्प्यूटर काडर के पांच कर्मचारियों को क्लर्क काडर दे दिया गया था, जबकि कम्प्यूटर काडर भी टेक्निकल पोस्ट है और इस काडर में भी नियमों के तहत बदलाव नहीं किया जा सकता। इनमें सर्बजीत कौर, चरनजीत कौर, जतिंदर कौर, राजिंदर कौर और हरिंदर कौर शामिल थे।

इस बारे में शिकायत मिलने पर 14 दिसंबर 1999 को इनमें से चार कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जबकि एक क र्मचारी चरनजीत कौर की 27 अक्टूबर 1998 को मौत हो चुकी थी। बाकी चार कर्मचारियों में से सर्बजीत कौर ने 16 अगस्त 2000 को अपनी इच्छा से नौकरी से रिटायरमेंट ले ली। अधिकारियों को जतिंदर कौर हरिंदर कौर का ही जवाब मिला, जो असंतोषजनक रहा।

उसके बाद से राजिंदर कौर ड्यूटी से गैरहाजिर चल रही थीं, जिसके चलते अनुशासनात्मक कार्रवाई के चलते उन्हें 16 जुलाई 2001 को बर्खास्त कर दिया गया, जबकि इससे पहले ही बाकी दो कर्मचारियों जतिंदर कौर और हरिंदर कौर को क्लर्क काडर बदलकर वापस कम्प्यूटर कैडर में रिवर्ट कर दिया गया था। विभाग के अधिकारियों ने टेक्निकल काडर में ऐसे बदलाव को गलत और नियमों के खिलाफ बताया था।

अनदेखी का दर्ज हो चुका है केस
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एक ऐसे ही मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सरकारी नियमों की अनेदखी करते हुए कर्मचारियों के काडर बदलने और दो कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के आरोप में विजिलेंस की ओर से पिछले साल दिसंबर में केस भी दर्ज किया गया था। विजिलेंस प्रमुख सुरेश अरोड़ा ने बताया था कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एडिश्नल सेक्रेटरी अवतार सिंह ने शिकायत की थी कि विभाग के सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए क्लर्क सुमन और अध्यापक गुरप्रीत के काडर बदलने और ईटीटी टीचर अमनप्रीत कौर की पुनर्नियुक्ति संबध रिकॉर्ड में हेराफेरी कर बदलाव किया।

क्यों किया नियम का दुरुपयोग
पंजाब सिविल सर्विस के रूल 3.17ए का दुरुपयोग कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपने चहेते उन कर्मचारियों को राहत देने के लिए करते हैं, जो पंजाब के अलग-अलग जिलों में टेक्निकल पोस्ट पर कार्यरत हैं। टेक्निकल पोस्ट पर किसी तरह की प्रमोशन नहीं हो सकती। ऐसे में प्रमोशन पाने के लिए इस रूल का दुरुपयोग कर संबंधित कर्मचारी का काडर क्लर्क करवा लिया जाता है, क्योंकि क्लर्क काडर मिलने के बाद आगे प्रमोशन हो सकती है। हालांकि इस रूल के तहत काडर में बदलाव कर्मचारी को सजा देने के लिए किया जाता है, लेकिन अपने चहेते कर्मचारियों को राहत दिलाने के लिए अधिकारी इस रूल का दुरुपयोग कर रहे हैं।

मैंने इस मामले की रिपोर्ट मांगी है। जिन कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं, उनका रिकॉर्ड भी तलब किया गया है, ताकि पूरे मामले का पता चल सके।
-एम.एम. मित्तल, स्वास्थ्य मंत्री,