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बीरेंद्र सिंह के खास विभोर बतरा किडनेप नहीं हुआ, लोगों के करोड़ों रुपए लेकर भागा

7 वर्ष पहले
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पंचकूला। बीजेपी का युवा नेता और चौधरी बीरेंद्र सिंह का खास विभोर बत्तरा किडनैप नहीं हुआ, बल्कि लोगों के करोड़ों रुपए लेकर फरार हुआ है। आरोप हैं कि वह करीब 4 लोगों से सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर 15 लाख, 3 बिजनसमैनों से करोड़ों रुपए, शराब ठेकेदार से करीब 50 लाख हड़प कर ले गया है।
विभोर के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व यूथ कांग्रेस नेता विक्रम उर्फ शैफी के पिता मुकेश शर्मा से भी करीब 23 लाख रुपए की ठगी की गई है। पैसे वापस न देने पड़ें, इसलिए अब वह अंडरग्राउंड हो चुका है। चर्चा है कि विभोर की तलाश कर रहे एक इंस्पेक्टर से वह फरार होने से पहले और दो दिन बाद तक लगातार संपर्क में रहा है। सूत्रों की मानें तो अपने रसूख के चलते ही इस इंस्पेक्टर को एसएचओ की कुर्सी भी विभोर ने दिलवाई थी।
विभोर का अंडरग्राउंड होने का सिलसिला पहली बार नहीं है। पहले भी कई कई दिनों तक वह वापस घर ही नहीं आता था। इस बारे में उसके घर वालों को भी पता नहीं होता था कि वह कहां है। उसकी कई-कई दिनों तक बातचीत भी नहीं हो पाती थी। इस बार बीजेपी की टिकट अनाउंस होने के बाद बत्तरा के घर पर कई लोगों ने रुपए मांगने के लिए चक्कर लगाए। इसके बाद घरवालों ने पुलिस में किडनैपिंग की एफआईआर दर्ज करवाई। उन्हें डर था कि कहीं विभोर को किसी ने किडनैप तो नहीं कर लिया है। इसी कारण से उसकी मां अरुण बत्तरा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस के आई शिकायतों में पंजाब एरिया के कपूरथला के लोगों के साथ पंचकूला के दो लोगों ने भी शिकायतें दी हैं।
एयरपोर्ट पर नहीं मिला सुराग, नेपाल भागने का शक
पंचकूला पुलिस ने विभोर के बारे में जब पता किया तो एयरपोर्ट पर भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। अभी तक की जांच में सामने आया है कि उसके पासपोर्ट से कोई ट्रैवलिंग नहीं की गई है। वहीं पुलिस को शक है कि शायद विभोर मोटी रकम के साथ नेपाल की ओर भाग गया है, क्योंकि वहां पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती।