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ऑनर किलिंग: बेटी का मर्डर करने वाले पिता और चाचा को फांसी

7 वर्ष पहले
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पंचकूला. बरवाला के गांव खंगेसरा में बेटी के प्रेम प्रसंग का पता चलने के बाद 21 अक्टूबर 2013 को उसकी हत्या करने वाले पिता और चाचा को पंचकूला की सेशंस कोर्ट ने बुधवार को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक केस भगवानदास के मामले का तर्क दिया।

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई परिवार अपने बेटे या बेटी को किसी जमीन या अन्य लाभ के लालच में मारता है तो यह हत्या होगी। फांसी के आदेशों को अंबाला जेल वार्डन के पास भिजवा दिया गया है। बुधवार को जब कोर्ट ने मृतका के पिता शौकीन और चाचा सलीम को फांसी की सजा सुनाई तो उसके बाद जेल जाते समय उनके माथे पर कोई शिकन नहीं थी, जैसे उन्हें लग ही न रहा हो कि उन्होंने कोई पाप किया है। शौकीन और सलीम को कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302 यानी हत्या, 120 बी यानी क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी के तहत मौत की सजा सुनाई। साथ ही धारा 302 के तहत 2000, धारा 120 बी के तहत 2000 और धारा 201 यानी सबूत मिटाने के आरोप में 2000 रुपए प्रति व्यक्ति जुर्माना भी लगाया है।
क्या था मामला
ताहिरा का अपने होने वाले जीजा वसीम से प्रेम प्रसंग था। जब उनके घर सहारनपुर में पता चला तो ताहिरा को उसके चाचा सलीम के पास खंगेसरा भेज दिया गया। यहां सलीम और उसके बेटों ने उसका मर्डर किया। उसके बाद उसे जलाया गया और कपड़ों को अलग और उसे अलग दफना दिया गया। इस बारे में पिता शौकीन को पता था, पर मां जुबेदा बेगम को नहीं पता था। उसके कहने पर घरवाले यहां आए और बेटी न मिलने पर जुबेदा पुलिस के पास गई थी। पुलिस की जांच में मामला सामने आया था। ताहिरा के कपड़ों को अलग जलाया गया। उसके बाद गड्ढा खोदकर उसे दफनाया गया। शरीर को जल्दी गलाने के लिए नमक भी डाला गया।
मां भी कोर्ट में मुकरी
इस केस में सबसे खास बात यह रही कि ताहिरा की मां जुबेदा बेगम ने ही अपनी बेटी के गायब होने की बात पुलिस के सामने रखी थी, लेकिन कोर्ट में वही अपने बयानों से मुकर गई थी। जुबेदा, नाना कलामदीन और मामा गयूर ने अस्पताल में मर्डर के बाद शव की पहचान की थी, जबकि कोर्ट में गवाही के दौरान शव को पहचानने से मुकर गए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी कोर्ट की मददगार
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही कोर्ट की सबसे बड़ी मददगार बनी। रिपोर्ट में सामने आया कि ताहिरा के शरीर पर चोट के निशान थे। उसका दम घुटने की पुष्टि हुई थी, जिससे साबित होता है कि उसका कत्ल किया गया था। वहीं, अभी दो अन्य आरोपियों ताहिरा के सगे भाई और चाचा के बेटे का जुवेनाइल कोर्ट में केस चल रहा है।
सजा के बाद पिता और के चेहरे पर कोई पछतावा नजर नहीं आया।