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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. राज्य में कर्मचारियों ने 72 घंटे पूरे होते ही अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि कर्मचारी पहले इस हड़ताल को दो दिन और आगे बढ़ाने का मन बना रहे थे, लेकिन बिजली, चिकित्सा और पानी जैसी व्यवस्थाएं चरमराने के कारण स्थानीय लोग उनके विरोध में उतर आए। जन विरोध को देखते हुए कर्मचारियों को हड़ताल आगे बढ़ाने का फैसला टालना पड़ा। इससे पहले उन्होंने प्रयास किए कि सरकार से वार्ता का औपचारिक लिखित निमंत्रण मिले। परंतु सरकार ने लिखित निमंत्रण देने से मना कर दिया। शाम को करीब 5.30 बजे मुख्य सचिव एस. सी. चौधरी ने कर्मचारियों को वीरवार सुबह 11 बजे सचिवालय में उनकी मांगों पर बात करने का भरोसा दिलाया। इससे पहले मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शाम 5 बजे हुई मीटिंग में हड़ताल से निपटने की रणनीति पर विचार किया गया।
बैठक में ज्यादातर अधिकारियों का फीडबैक था कि जन विरोध के कारण कर्मचारी हताश हैं और जल्द हड़ताल तोड़ देंगे। परंतु यदि हड़ताल 2 दिन और आगे बढ़ती है तो कॉन्ट्रेक्ट पर लगे हड़ताली कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह नई भर्तियां की जाएं। कुछ जगहों पर बिजली कंपनियों ने दैनिक वेतन पर भर्तियां शुरू भी कर दी थीं। आवश्यक सेवाओं को बाधित करने और तोडफ़ोड़ के मामले में एफआईआर दर्ज करने के साथ ही गिरफ्तारियां करने की तैयारी भी कर ली गई थी।
बिजली-पानी से बिगड़े हालात: ज्यादातर शहरों में लगातार तीसरे दिन भी बिजली-पानी नहीं मिलने से लोगों में काफी आक्रोश था। कड़ाके की ठंड और बिजली नहीं होने के कारण कई जगहों पर तो लोगों को नहाए हुए भी दो दिन हो गए थे। यमुनानगर शहर के अलावा 300 से अधिक गांवों में मंगलवार शाम से बिजली-पानी नहीं मिली। पानी के लिए लोगों को हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ा। पशुओं के लिए चारे की भी समस्या हुई। अम्बाला सिटी व कैंट की 20 कॉलोनियों में ब्लैक ऑउट रहा और कई फीडर ठप हुए। रोहतक के आसन और कंसाला में बिजली और पानी को लेकर लोगों ने जाम लगाया। लोग हिंसक होने लगे थे।
आखिरी दिन कॉन्ट्रेक्ट पर भर्तियों की आई याद
कर्मचारियों ने हालांकि पहले ही 72 घंटे की सांकेतिक हड़ताल का आह्वान किया था। परंतु इसके आगे बढऩे की आशंका में बिजली कंपनियों ने कॉन्ट्रेक्ट पर भर्ती का फैसला कर लिया था। कैथल में भर्ती के लिए आवेदन लेने शुरू कर दिए गए थे।
बिजली कंपनियों को 25 करोड़ का नुकसान
बिजली कर्मचारियों की दो दिन की हड़ताल से बिजली कंपनियों को 48 घंटे में ही करीब 25 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। जेनरेशन कंपनी के एक इंजीनियर ने बताया कि इस दौरान प्रदेश में करीब 4 करोड़ 80 लाख यूनिट बिजली की खपत कम हुई है। चूंकि बिजली स्टोर नहीं हो सकती, इसलिए प्लांट या कम चलाए गए। इससे करीब 1000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कम हुआ। प्लांट बंद करने या उत्पादन कम करवाने पर वितरण कंपनियों को लगभग 1 रुपए प्रति यूनिट की दर से फिक्स कॉस्ट देनी होती है। इससे 4.80 करोड़ रुपए तो सीधे-सीधे वितरण कंपनियों को भुगतने होंगे। यदि यही बिजली सप्लाई होती उपभोक्ताओं से कंपनियों को एवरेज 4.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से लगभग 21.6 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता, जो नहीं मिला।
वीरवार को भी सड़कों पर उतरे लोग
हड़ताल खत्म होने के बाद भी बिजली-पानी सप्लाई की समस्या बनी रही। क्योंकि कर्मचारी तो शुक्रवार से ही ड्यूटी पर आएंगे। प्रदेशव्यापी हड़ताल से त्रस्त लोग वीरवार को भी सड़कों पर उतरे। प्रदेश में कई जगह प्रदर्शन हुए। जाम लगाया गया। हिसार में गुस्साए लोगों की बिजली कर्मचारियों के साथ झड़प हुई। पुलिस ने जींद में लोगों पर लाठियां भांजीं। गुस्साए लोगों ने बतख चौक पर पुलिस की पीसीआर भी फूंक दी। रोहतक में बिजली सप्लाई फौरन बहाली को लेकर लोगों ने पथराव किया। समालखा में महिलाओं ने बिजलीघर पर धावा बोल दिया।
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