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हाईकोर्ट में कांस्टेबल और वकीलों में मारपीट

9 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में मंगलवार को एक कांस्टेबल और वकील के बीच विवाद इतना बढ़ा कि कोर्ट में कामकाज आधा दिन ठप रहा।
सुबह करीब 10.20 बजे, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व पंजाब के पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल रुपिंदर खोसला जैसे ही हाईकोर्ट इमारत में दाखिल हुए, तो कांस्टेबल रमेश चंद ने उन्हें प्रवेश का मैग्नेटिक कार्ड दिखाने को कहा।
खोसला ने कार्ड न होने की बात कही। इस पर कांस्टेबल ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें रोकना चाहा तो उनमें धक्का-मुक्की और फिर मारपीट होने लगी। देखते ही देखते कई वकील कांस्टेबल से मारपीट में शामिल हो गए। वह चौकी की तरफ भागा तो वकील भी उसके पीछे वहीं पहुंच गए। गुस्साए वकीलों ने उसे बाहर निकालने के लिए चौकी में भी तोडफ़ोड़ की।
इस दौरान चौकी में तैनात अन्य कर्मियों से भी हाथापाई हुई। मौके पर डीएसपी आशीष कपूर, एसएचओ श्री प्रकाश, एसएसपी ऑपरेशन आरएस घुम्मन, एसपी अरुण कंपानी आदि पहुंचे। अफसरों की मौजूदगी में भी पुलिसकर्मियों से हाथापाई जारी रही। इस पर भारी फोर्स बुलानी बड़ी। बार काउंसिल के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मसला सुलटाया।
इसके बाद शाम को चीफ जस्टिस के साथ बैठक के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव रंजीवन सिंह ने कहा कि हवलदार को सस्पेंड कर दिया गया है और डीआईजी आलोक कुमार ने उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
प्रशासन के अफसर तलब
घटना के बाद देर शाम प्रशासन का अमला हाईकोर्ट पहुंचा। होम सेक्रेटरी, फाइनेंस सेक्रेटरी, डीआईजी और डीएसपी हाईकोर्ट पहुंचे और चीफ जस्टिस के साथ बैठक की। बैठक में बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी शामिल हुए। बार के अध्यक्ष कुलबीर सिंह धालीवाल ने कहा कि सुबह साढ़े नौ बजे जनरल हाउस की बैठक बुलाकर वकीलों को सारे घटनाक्रम की जानकारी दी जाएगी।
वकीलों ने किया काम का बहिष्कार
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दोपहर एक बजे जनरल हाउस की बैठक बुलाई। इसमें सर्वसम्मति से काम न करने का फैसला लिया गया।
मुवक्किल हुए परेशान
वकीलों के काम न करने से सबसे ज्यादा परेशानी का सामना मुवक्किलों को करना पड़ा। दूर दराज से हाईकोर्ट आए लोगों को महज केस में तारीख लेकर ही लौटना पड़ा। दोपहर के बाद आधा दिन कामकाज प्रभावित रहा।
कार्ड सिस्टम दो हफ्ते के लिए बंद
मंगलवार को ट्रायल के तौर पर मैग्नेटिक कार्ड सिस्टम लागू किया गया था। देर शाम चीफ जस्टिस के साथ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक के बाद दो हफ्ते के लिए कार्ड सिस्टम बंद रखने का फैसला लिया गया।
पहले कांस्टेबल ने थप्पड़ मारा: खोसला
एडवोकेट रुपिंदर खोसला ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि कांस्टेबल अपनी ड्यूटी कर रहा था। मुझे रोकने तक सब सही था, लेकिन मुझे थप्पड़ जड़ देना बर्दाश्त करने लायक बात नहीं थी। चश्मदीद वकीलों ने तैश में आकर हवलदार की पिटाई की।
मेरी क्या हिम्मत, जो वकील पर हाथ उठाऊं: कांस्टेबल
कांस्टेबल रमेश ने कहा, मेरी क्या हिम्मत जो मैं किसी वकील पर हाथ उठाऊं। मैंने तो सिर्फ कार्ड सिस्टम के जरिये एंट्री करने को कहा था। मुझे बुरी तरह पीटा गया। मैं भागकर चौकी पहुंचा, वहां पुलिसकर्मियों के सामने भी मुझे मारा गया। मुझ पर झूठा आरोप लगाया गया कि मैंने शराब पी है। जबकि मेडिकल में साबित हो गया कि मैं नशे में नहीं था। मुझे 12 जगह चोट आई है। मुझे ही सस्पेंड कर दिया गया।