चंडीगढ़. माेगा सैक्स स्कैंडल में फंसे होने के कारण पीपीएस अफसर परमदीप सिंह संधू को आईपीएस बनाने का केस एक बार फिर से रोक लिया गया है। पिछली बार की तरह उन्हें छह महीने के लिए प्रोविजनल आईपीएसशिप मिलेगी। इस बीच वह अपने केस से बरी नहीं हुए तो वह आईपीएस से डीलिस्ट हो जाएंगे। दिल्ली में हुई यूपीएससी की मीटिंग में 15 अफसरों के नाम पांच पोस्टों के लिए कंसीडर किया गया था। सूत्रों से पता चला है कि सुखवंत सिंह गिल, जसप्रीत सिंह सिद्धू, गुरमीत सिंह चौहान और नवीन सैणी के नाम को मंजूरी दे दी गई है। यूपीएससी की प्रोसीडिंग मिलने के बाद एमएचए इन चारों को आईपीएस बनाने संबंधी नोटिफिकेशन जारी करेगा।
मीटिंग यूपीएससी के मेंबर एचसी गुप्ता की अध्यक्षता में हुई। इसमें चीफ सेक्रेटरी सर्वेश कौशल, एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी कम प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम जगपाल सिंह संधू और केंद्र सरकार के दो ज्वाइंट सेक्रेटरी शामिल हुए। डीजीपी सुमेध सिंह सैणी को भी मीटिंग में जाना था लेकिन वह नहीं गए।
सीबीआई कर रही संधू केस की जांच
काबिले गौर है कि परमदीप सिंह संधू आईपीएस बनने वालों में सबसे सीनियर हैं लेकिन उन पर मोगा सैक्स स्कैंडल में शामिल होने के आरोपों की जांच सीबीआई कर रही है। जिस कारण पिछले दो सालों से उनका नाम लटकता आ रहा है। यह पोस्ट यूपीएससी ने खाली रख दी है। हर साल पीपीएस से आईपीएस बनने के लिए जिन नामों की सूची यूपीएससी में भेजी जाती है उसमें परमदीप सिंह संधू का नाम भी शामिल होता है लेकिन चूंकि उनके केस का छह महीने में कोई फैसला नहीं होता इसलिए उनको डीलिस्ट कर दिया जाता है।