पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Golf Clubs Are Also Willing To Pay 50 Million

गोल्फ क्लब 50 लाख भी देने को तैयार नहीं, प्रशासन चाहता है 1.80 करोड़ रुपए

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

चंडीगढ़। चंडीगढ़ गोल्फ क्लब की लीज का मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा। क्लब की नई लीज 50 लाख के फेर में फंस गई है। हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त मीडिएटर रिटायर्ड जस्टिस कुलदीप सिंह प्रशासन और क्लब के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। क्लब मैनेजमेंट साल के 50 लाख रुपए देने को भी तैयार नहीं है, वहीं प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह 50 लाख रुपए सालाना लीज तो किसी भी हाल में नहीं लेगा। लीज मनी के विवाद को सुलझाने को लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन सहमति नहीं बन पाई।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस कुलदीप सिंह को दो हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखने को कहा था। हाईकोर्ट ने 1 मई को क्लब मैनेजमेंट को फटकार लगाई थी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस जसबीर सिंह ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि क्लब में चुनाव व पार्टियों में लाखों रुपए खर्च किए जा सकते हैं, तो फिर लीज मनी देने में क्या परेशानी है। चंडीगढ़ गोल्फ क्लब कोई गरीब क्लब नहीं है। क्लब मैनेजमेंट ने विवाद के निपटारे के लिए समय मांगा था।

पांच साल के मांगे हैं 9.27 करोड़ रुपए
गोल्फ क्लब की लीज 16 मार्च 2008 को खत्म हो चुकी है। प्रशासन ने 16 मार्च 2008 से 15 मार्च 2013 के दौरान पांच साल की अवधि के लिए नई लीज के हिसाब से 9.27 करोड़ रुपए क्लब से मांगे हैं। प्रशासन क्लब की लीज करीब 15 लाख रुपए महीना तय कर रहा है, यानी साल के 1.80 करोड़ रुपए। गोल्फ क्लब को यह मंजूर नहीं। क्लब दिल्ली गोल्फ क्लब की तर्ज पर लीज की मांग कर रहा है। दिल्ली गोल्फ क्लब की लीज मनी ६ लाख रुपए है।

होम मिनिस्ट्री ने कहा- रेट पर समझौता नहीं
वहीं होम मिनिस्ट्री ने प्रशासन को स्पष्ट कर दिया है कि वह मार्केट रेट से कम पर समझौता न करे। प्रशासन को कोर्ट में अपना स्टैंड स्पष्ट रखने को कहा गया है। गोल्फ क्लब की लीज मनी कम करने की याचिका होम मिनिस्ट्री पहले ही ठुकरा चुकी है। होम मिनिस्ट्री ने अपने आदेश में कहा था कि क्लब के पास करोड़ों की एफडी है, ऐसे में उसे बढ़ी हुई लीज देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।