पंचकूला. बूथ का कन्वेंस डीड न करने पर कोर्ट ने हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) का बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया है।
एडीशनल सिविल जज सीनियर डिविजन भावना जैन के आदेश पर हुडा के इंडियन बैंक (42867663) खाते को सील किया गया। कोर्ट ने हुडा के मुख्य प्रशासक डीपीएस नागल और पंचकूला के इस्टेट ऑफिसर अश्विनी शर्मा की गाड़ी भी अटैच करने को कहा था। मंगलवार को कोर्ट के अधिकारी गाड़ियों को अटैच करने पहुंचे तो हुडा के लीगल एडवाइजर ने उन्हें कोर्ट में 16 मई को तारीख के बारे में कहकर टाल दिया।
मामला सेक्टर-10 के बूथ नंबर 39 का है। इसे ओमप्रकाश ने वर्ष 1989 में खरीदा था। इसके एवज में 10 प्रतिशत मौके पर और बाकी 15 प्रतिशत राशि 30 दिनों के अंदर जमा की थी। बची रकम किस्तों में जमा करनी थी, लेकिन ओमप्रकाश 6 किस्तें नहीं दे पाए थे। हुडा ने उन्हें नोटिस देकर 29 प्रतिशत ब्याज लगाकर बकाया राशि देने को कहा।
इतने ज्यादा ब्याज के विरोध में ओमप्रकाश कोर्ट चले गए। 2008 में कोर्ट ने ओमप्रकाश के हक में फैसला दिया और कहा कि 10 फीसदी ब्याज के हिसाब से बकाया राशि ली जाए। ओमप्रकाश ने ब्याज सहित 8.45 लाख रुपए हुडा को जमा करा दिए।
2009 में हुडा ने सेशंस कोर्ट में अपील की, फैसला ओमप्रकाश के हक में आया। २क्१क् में हुडा ने हाईकोर्ट में अपील की। वहां से भी ओमप्रकाश के हक में फैसला आया। 2010 में हुडा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2011 में ओमप्रकाश के हक में फैसला दिया। ओमप्रकाश बूथ की कन्वेंस डीड अपने दोस्त के बेटे नरेश के नाम कराने के लिए हुडा ऑफिस में धक्के खाते रहे, लेकिन हुडा ने एक न सुनी। तंग आकर ओमप्रकाश ने एडीशनल सिविल जज की कोर्ट में अपील दायर की।
ये पड़ेगा असर
हुडा के इंडियन बैंक के जिस खाते को फ्रीज किया गया है, उससे हुडा के रोजाना सैकड़ों लेन-देन होते थे। यह लेन-देन प्रोजेक्ट्स या फिर आधिकारिक स्तर पर खर्च के लिए था। फिलहाल इस खाते से यह खर्च नहीं हो पाएगा। सुप्रीमकोर्ट से ओमप्रकाश के हक में फैसला आने के बाद हुडा ने इसी खाते से उन्हें एक चेक दिया था। इस चेक को अभी कैश नहीं कराया जा सकेगा।
कोर्ट ऑर्डर को लीगल सेल भेजा था। यह पुराना केस है, जिस पर हाई लेवल पर डिसिजन हुआ है। लीगल सेल ही इसे हैंडल कर रहा है।
-अश्विनी शर्मा, इस्टेट ऑफिसर
हुडा की हद
24 साल पहले हुडा से बूथ खरीदा, पर कुछ किस्तें वक्त पर न दे पाए। हुडा ने मनमर्जी से ब्याज लगा दिया। ज्यादा ब्याज के विरोध में ओमप्रकाश कोर्ट गए तो फैसला उनके हक में आया। हुडा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन हर बार फैसला ओमप्रकाश के हक में ही आया। इसके बाद भी ओमप्रकाश के बूथ की कन्वेंस डीड नहीं हो पाई है।