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रुचिका छेड़छाड़: हाईकोर्ट ने पूछे सवाल, संस्था से भी मांगा जवाब

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. रुचिका छेड़छाड़ मामले में हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर के खिलाफ नए सिरे से जांच की मांग करने वाली स्वयं सेवी संस्था के याचिका दायर करने के अधिकार पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सवाल खड़ा किया है। अदालत ने पूछा है कि संस्था को याचिका दायर करने के लिए किसने अधिकृत किया। संस्था को फंड कहां से मिलते हैं, संस्था का कोई बैंक खाता नहीं है तो फिर चेक के जरिए दान राशि स्वीकार क्यों की जा रही है?

याचिका पर राठौर की तरफ से उनकी पत्नी और वकील आभा राठौर ने आपत्ति दर्ज कर कहा था कि संस्था इस मामले में प्रभावित पक्ष नहीं है। ऐसे में उसे याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है।

स्वयं सेवी संस्था वल्र्ड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन काउंसिल के चेयरमैन वकील रंजन लखनपाल ने जनहित याचिका दायर कर इस सारे मामले की नए सिरे से जांच की मांग की थी। इस याचिका में आपराधिक मामले के विचाराधीन रहते राठौर को प्रमोशन देकर डीजीपी बनाने पर सवाल उठाए गए हैं। हाईकोर्ट में यह मामला वर्ष 2010 से विचाराधीन है।

स्कूल का भविष्य भी दांव पर

रुचिका से छेड़छाड़ के बाद उसे स्कूल से निकाले जाने पर आईएएस प्रेरणा पुरी की जांच रिपोर्ट के बाद चंडीगढ़ सेक्टर-26 स्थित सेक्रेड हार्ट स्कूल ने भी हाईकोर्ट में दस्तक दी। स्कूल की तरफ से अदालत में डीपीआई स्कूल उपकार सिंह के 21 फरवरी 2013 के पत्र को अदालत में पेश किया गया। इसमें स्कूल को सीनियर सेकेंडरी लेवल की मान्यता याचिका पर फैसले के अधीन प्रोविजनल आधार पर 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2014 तक दी गई है। स्कूल की तरफ से डीपीआई के इस आदेश की कॉपी को दिखाते हुए कहा गया कि उनका भविष्य हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर है। ऐसे में मामले का तय समय में निपटारा किया जाए। रुचिका से छेड़छाड़ की घटना के बाद उसे सेक्रेड हार्ट स्कूल से निकाल दिया गया था। राठौर की बेटी भी उसी स्कूल में पढ़ रही थी।