(मंच पर प्रस्तुति देते छात्र-छात्राएं।)
चंडीगढ़। सेंट जॉन्स हाई स्कूल सेक्टर-26 में चार दिवसीय एनुअल हाउस शो मंगलवार से शुरू हुआ। पहले दिन ब्रदर मॉरीसी हाउस के स्टूडेंट्स ने फंक्शन में अॉनर थीम पर परफाॅर्मेंस दी। प्रोग्राम में सीबीएसई के रीजनल ऑफिसर आरजे खांडेराव बतौर चीफ गेस्ट रहे। स्टूडेंटस ने शो बताया कि हमें किन बातों पर गर्व है। इस शो में 6वीं से 10वीं क्लासेस के स्टूडेंट्स ने हिंदी, इंग्लिश प्ले और सॉन्ग पेश किए गए।
शो में कई स्टूडेंट्स के पेरेंट्स भी आए। "द पर्पल चिल्ड्रन' प्ले में स्टूडेंट्स ने बताया कि ऐसे स्कूल स्टूडेंट्स की वीरता की कहानी बताई जो कि ब्रिटिश सरकार में टाइट सिक्योरिटी के बावजूद भारत का झंडा फहराते हैं और ब्रिटिश गवर्नमेंट के अाॅफिसर उनके कपड़ों को पर्पल कलर से रंग देते हैं। शो को इस तरह से ही पेश किया गया था कि स्कूल के मोटाे "फाॅर गॉड एंड कंट्री' का संदेश सभी तक क्लियर पहुंचे। आरजे खांडेराव ने स्टूडेंट्स और टीचर्स की सराहना की। स्कूल प्रिंसिपल कविता दास ने अपनी स्पीच में स्टूडेंट्स को मोटिवेट किया और पेरेंट्स का धन्यवाद किया।
अपने काम से इंडिया को दिलाया ऑनर
सेंट जॉन्स के स्टूडेंट्स ऐसे भी हैं जिन्होंने न सिर्फ स्कूल बल्कि देश के लिए भी ऑनर यानी गर्व का काम किया है। सीबीएसई ने जापान ईस्ट एशिया नेटवर्क ऑफ एक्सचेंज फॉर स्टूडेंट्स एंड यूथ्स (जेनेसिस) प्रोग्राम के लिए चंडीगढ़ से चिराग ठाकुर को चुना गया था। हालही में वह जेनेसिस के लिए 8 दिनों के कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जापान जाकर आए।
दूर की जापानियों की गलतफहमी
9वीं क्लास के स्टूडेंट चिराग ने बताया कि प्रोग्राम के तहत उनका होम स्टे था। ऐसे में वह जापानी लोगों के घर में ही ठहरे थे। इंटरैक्शन के दौरान चिराग को पता लगा कि जापानी सोचते हैं कि इंडियन फूड सिर्फ करी है। इसलिए उन्होंने वहां पर अलग-अलग इंडियन डिशेज को बनाया। इनमें सबसे खास रही पुलाव और खीर। वह इसलिए क्योंकि जापानी चावलों को बहुत पसंद करते हैं। चिराग ने बताया कि जापानियों की इस गलतफहमी को भी दूर किया कि हमारा देश भूखे नंगों का देश है और कोई प्लानिंग नहीं है।
चिराग ने चंडीगढ़ की प्लानिंग के हवाला देते हुए बताया कि कौन-कौन से भारतीय दुनिया की टॉप कंपनियों के उच्च स्थानों पर हैं। चिराग ने कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि कैसे भारतीय एजुकेशन सिस्टम बेहतर है क्योंकि हम हिस्ट्री में उन सभी राजाओं का जिक्र करते हैं जो हमारे देश में आए फिर चाहे वह भारतीय थे या नहीं जबकि जापान में सिर्फ उन्हीं की बात होती है जो जापानी थे।
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