चंडीगढ़। मंगलवार शाम गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी में इंटरनेशनल आर्ट कॉन्क्लेव का आगाज़ हुआ। शहर में पहली बार इस तरह का इवेंट हो रहा है। चार दिन तक चलने वाले इस इवेंट में विश्वभर से अाने वाले 10 आर्टिस्ट्स अपने आर्ट वर्क को शहर के आर्टिस्ट्स और आर्ट लवर्स से शेयर करेंगे। पहले दिन यूएसए के जॉन रूपर्ट और यूके की एनी बीन के नाम रहा। दोनों ने एक ऑडियो-वीडियो प्रेजेंटेशन के जरिए अपनी आर्टिस्टिक जर्नी शेयर की।
जॉन रूपर्ट हों या एनी बीन, दोनों का आर्ट वर्क एक ही मीडियम तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये मल्टीपल मीडियम्स में काम करते हैं। जॉन रूपर्ट का आर्ट आर्कियोलॉजी से इंस्पायर्ड है। फिर चाहे स्कल्पचर्स हों या 10-10 फुट इमेजेस हों। इनमें पहाड़, पत्थर, वोलकेनो, लावा , बादलों की परछाई, पेड़ों के तने दिखते हैं। इसलिए इन्हें क्रिएट करने के लिए भी इनसे मिलता-जुलता मटीरियल यूज करते हैं।
उदाहरण के तौर पर ऑरिजनल रॉक, एलुमीनियम और ब्रास से बने रॉक को एक इंस्टॉलेशन के तौर पर रखना फिर उनके अंतर की बात करना, वहीं दूसरी ओर स्टील से बने इंस्टॉलेशन, जिसमें आर्टिस्ट ने थ्री डी में काम किया है। ऑरिजनल स्टील कलर या फिर कलर्ड स्टील से बने चेन-लिंक फैब्रिक और उनके बीच में कभी लाइट्स तो कभी घास से दिए गए इफेक्ट, सभी
खूबसूरत थे। वहीं दूसरी आर्टिस्ट एनी बीन का आर्ट वर्क इंस्टॉलेशन अौर परफॉर्मेंसेस पर बेस्ड था। एनी ने अलग-अलग टेक्नीक्स, म्यूजिक और साउंड को यूज करके इन्हें क्रिएट किया है। 40 साल से वे इस लाइव आर्ट को प्रेजेंट कर रही हैं। एक आर्ट वर्क में इन्होंने दिखाया कि किस तरह 1365 ड्रेसेस को इन्होंने लैंडस्केप का हिस्सा इस तरह से बनाया कि वे उसी में रमती दिखीं। कुल मिलाकर चंडीगढ़ के आर्ट लवर्स के लिए यह एक अनोखा अनुभव था
रेडिएंट फील्ड्स है खास
एनी बीन के आर्ट वर्क में बलूंस के साथ हवा में उड़तीं फ्लोरल ड्रेसेस, सुलेमानिया में रेड जेल में बलूंस की आवाज से कबूतरों को उड़ाना, उन्हें डराना, अलग ही अंदाज में पेश किया गया है। एक बिल्डिंग में लाइट्स और फुलझड़ियों के साथ लाइटिंग का इफेक्ट एक अलग अनुभव था। लेकिन जो सबसे खूबसूरत चीज थी वह थी, साल भर में 5000 सेब के साथ तैयार किया गया इंस्टॉलेशन, “रेडिएंट फील्ड्स’।