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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. लोकायुक्त जस्टिस प्रीतम पाल के निर्देशों के बावजूद सरकार यमुना नगर के जेलर सुखराम बिश्नोई का तबादला तक नहीं कर पा रही है। करीब 10 दिन से जेलर के तबादले की फाइल सचिवालय में सीएमओ और मुख्य सचिव कार्यालय के बीच ही घूम रही है। यही वजह है कि जेलर के पर लगे आरोपों की जांच शुरू नहीं हो पा रही है। दरअसल बिश्नोई के खिलाफ वहीं के एक कर्मचारी ने लोकायुक्त को पिछले दिनों शिकायत की थी। इस शिकायत पर लोकायुक्त की टीम ने जेल पर छापा मारकर वहां कई तरह की गड़बडिय़ां पकड़ी थीं।
सूत्रों के अनुसार जेलर पर आरोप लगाने वाला कर्मचारी काफी भयभीत था। उसने लोकायुक्त से आग्रह किया था कि निष्पक्ष जांच के लिए जरूरी है कि जेलर को वहां से हटाया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो लोग खुलकर अपनी बात नहीं कह पाएंगे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए लोकायुक्त ने जेलर का तबादला करने के निर्देश दिए थे।
अधिकारी पर हैं गंभीर आरोप
जेलर सुखराम बिश्नोई पर आरोप हैं कि फर्जी बिल बना कर पैसे इधर-उधर किए जा रहे हैं। कैदियों की परिवार के सदस्यों से अनधिकृत रूप से बात करवाते हैं। जेल में मादक पदार्थ भी अंदर जाते हैं। यदि कोई कैदी पैसे नहीं देता तो उसे प्रताडि़त किया जाता है। शिकायतकर्ता ने शपथ पत्र और निर्धारित फीस के साथ लोकायुक्त को शिकायत दी थी।
डीआईजी कर रहे हैं जांच: इस मामले की जांच लोकायुक्त कार्यालय के डीआईजी कर रहे हैं। उन्होंने 10 जनवरी को यमुना नगर जेल में छापा मारकर रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया था।
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