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जज ने जब जज से पूछा 'क्यों न आप पर सबूत मिटाने की कार्रवाई की जाए

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। 'क्यों न आपके खिलाफ सबूत मिटाने की कार्रवाई की जाए।' सोमवार को जज नोट कांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों पर आरोप तय करने के लिए बहस के दौरान यह अहम बात रखी। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक आरोपी संजीव बंसल ने अपने पक्ष में बहस की।

बहस खत्म होने के बाद सीबीआई के विशेष जज विमल कुमार ने कहा कि जस्टिस निर्मल यादव और आपके (संजीव बंसल) के बयान में विरोधाभास है। जस्टिस यादव के वकील कह रहे हैं कि वे 13-14 अगस्त 2008 के घटनाक्रम को नहीं मानते। वे कह रहे हैं कि न उन्होंने रकम मांगी और न ही कोई रकम उन तक पहुंची। जबकि आप (संजीव बंसल) खुद कह रहे हैं कि रविंदर सिंह के कहने पर आपने जस्टिस यादव के यहां 14 अगस्त को रकम भिजवाई।

अदालत में आजकल पूर्व जस्टिस निर्मल यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर बहस चल रही है। सुनवाई के दौरान बंसल ने आईपीसी की धाराओं को लेकर बहस की। संजीव बंसल ने बहस के दौरान कहा कि कानूनी तौर से उन पर आईपीसी की धारा लागू नहीं होती। इस पर सीबीआई जज ने कहा कि क्यों न आप चारों को (संजीव बंसल, राजीव गुप्ता, निर्मल सिंह और रविंदर सिंह भसीन) आईपीसी की धारा 201 (सबूत मिटाने और असली गुनाहगार को बचाने के लिए सह आरोपी झूठ बोलें तो) के तहत चार्ज किया जाए।

अदालत ने कहा कि आपने 13 अगस्त से 16 अगस्त 2008 तक जस्टिस निर्मल यादव को बचाने के लिए जानबूझकर झूठ बोला और चंडीगढ़ पुलिस से कहा कि भेजी गई रकम किसी निर्मल सिंह के लिए थी। इसके आधार पर आपके खिलाफ आईपीसी की धारा 201 के तहत कार्रवाई बनती है। मंगलवार को रविंदर सिंह के वकील अमर सिंह चहल मामले में बहस करेंगे। इसके बाद सीबीआई की ओर से एडवोकेट अनुपम गुप्ता आरोपियों के वकीलों की बहस का जवाब देंगे।

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