(फाइल फोटो ज्योती)
चंडीगढ़. ज्योति मर्डर केस में दून के कांग्रेसी विधायक राम कुमार चौधरी समेत सभी 12 आरोपियों कोे बेनेफिट ऑफ डाउट पर बरी किया गया है, चूंकि इस पूरे केस में पुलिस ने ठीक से इन्वेस्टिगेशन नहीं की। पंचकूला की स्पेशल वुमंस कोर्ट ने यह अपनी जजमेंट में कहा है। सोमवार को जारी की गई जजमेंट में एडिशनल सेशंस जज रूपम सिंह ने कहा है कि ठीक इन्वेस्टिगेशन न करने के कारण पुलिस ही जानती है, जो कई चश्मदीदों को कोर्ट के सामने नहीं लाई। पुलिस ने अपने सरकमस्टांशियल एविडेंस प्रूव नहीं किए, कोर्ट में कई गवाहों से क्राॅस बयान करवाए। पुलिस अपने क्रॉस एग्जामिनेशन में चार्जशीट से विपरीत बयान देने लगी, नक्शा बनाने वाले पुलिसकर्मी यह कहकर मुकरने लगे कि वह बयान देने की हालत में नहीं हैं। जो डॉक्टर राम कुमार चौधरी को पहचानती थी, उसे चश्मदीद नहीं बनाया। जो डॉक्टर होस्टाइल हो गई, उसे चश्मदीद बनाया।
कोर्ट ने पुलिस की कई लापरवाहियां उजागर करते यह भी बताया है कि कैसे पुलिस वालों ने कोर्ट में कभी सवालों का जवाब देने के बजाय चुप्पी साध ली और कभी क्राॅस में चार्जशीट से अलग बयान दिए।
एएसपी ने माना कि राम कुमार के भाई ने साथ दिया, लेकिन उसका केस कैंसिल करा दिया
कोर्ट ने उदाहरण पेश करते हुए जजमेंट में बताया कि कैसे केस में पुलिस ने आरोपियों को फायदा पहुंचाया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने इस पूरे केस की जांच में राम कुमार चौधरी के भाई हरभजन और मदन पर केस दर्ज किया।
एएसपी वरिंदर सांगवान ने खुद कोर्ट में माना कि उनकी इन्वेस्टिगेशन के अनुसार मदन ने भी राम कुमार चौधरी की फरारी के दौरान मदद की। बावजूद इसके पुलिस ने मदन पर दर्ज केस को चार्जशीट से पहले ही खुद ही कैंसिलेशन के लिए भेज दिया। इतना ही नहीं कोर्ट ने कहा कि राम कुमार चौधरी और उसके साथियों को फर्जी आईडी पर सिम कार्ड देने वालों को पंचकूला पुलिस ने केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। जबकि इसी केस के आरोपी ड्राइवर तिलकराज को जिन्होंने फर्जी सिम कार्ड इश्यू किए थे, उनके बयान तक दर्ज नहीं करवाए।
जजमेंट में कोर्ट ने बताया- क्या आरोप साबित करने थे और क्यों प्रूव नहीं हो पाए
चौधरी और ज्योति का रिलेशन करना था प्रूव
कोर्ट ने कहा कि पुलिस को इस केस में यह साबित करना चाहिए था कि क्या आरोपी राम कुमार चौधरी का ज्योति के साथ कोई लव अफेयर था, क्या उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध थे।
एक भी गवाह पेश नहीं कर पाई पुलिस
कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने ऐसा एक भी विटनेस नहीं बनाया, जो साबित करता कि चौधरी और ज्योति में लव अफेयर था, उनमें शारीरिक संबंध थे। पुलिस ने आरोपियों के उनकी हिरासत में इकरारनामे को ही आधार बनाया, जो कोर्ट में एडमिसेबल नहीं है। पुलिस ने ज्योति के
मोबाइल और चौधरी के फोन की डिटेल्स लगाई, कहा कि दोनों में बात हाेती थी। केस में अाराेप था कि चौधरी ने ज्योति का अबाॅर्शन कराया। पुलिस ने उस डॉक्टर अदिति गुप्ता को गवाह बनाया, जिसने कहा कि वह चौधरी को पहचान नहीं सकती। कोर्ट में वह होस्टाइल डिक्लेयर हुई, जबकि आईवीआई अस्पताल की डॉक्टर गुरजीत कौर ने बयानों में साफ कहा कि राम कुमार चौधरी नाम का शख्स ही ज्योति को साथ लाया था और उसके कहने पर उसने गर्भपात की दवा ज्योति को रिकमेंड की थी। कोर्ट के मुताबिक डॉक्टर गुरजीत कौर से पुलिस ने चौधरी की शिनाख्त ही नहीं करवाई। ऐसा पुलिस ने क्यों किया, वो ही बेहतर जानती है।
क्रॉस में दिए बयानों ने पैदा किया शक
कोर्ट ने कहा कि चौधरी व ज्योति में रिलेशन साबित करने के लिए ज्योति की बहन की जो तस्वीर चार्जशीट में लगाई गई, वह ज्योति के चाचा लखविंदर ने एलबम से निकालकर पुलिस को दी। आईओ अजय राणा ने कोर्ट में बयान दिए कि फोटो ईमेल के जरिये उन्हें भेजी गई, जिसे वे साबित भी नहीं कर सके। क्राॅस में दिए ऐसे बयान शक पैदा करते हैं। एफएसएल ने अपनी जांच में कई बार कहा कि जो हैंडराइटिंग उन्हें मिलान के लिए दी है, वह इतनी कम है कि विस्तृत रिपोर्ट नहीं दी जा सकती।
चौधरी और साथियों की मौजूदगी करनी थी साबित
जिस दिन कत्ल हुआ, उस दिन राम कुमार चौधरी और उसके साथी साथ थे। इसके लिए सबूत दिए जाने जरूरी थे, ज्योति के साथ-साथ राम कुमार चौधरी और उसके साथियों की मौजूदगी साबित करनी जरूरी थी।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, टेक्निकल सबूत के साथ नहीं लगाए सर्टिफिकेट...