चंडीगढ़. ज्योति मर्डर केस में पंचकूला पुलिस की कारगुजारी के कारण आरोपी कोर्ट से बेनेफिट ऑफ डाउट ले गए। कोर्ट ने अपने फैसले में सब सामने ला दिया है कि पंचकूला पुलिस कैसे-कहां मुकरी और कहां-कहां लूपहोल्स छोड़े। जबकि हरियाणा के डीजीपी एसएन विशिष्ट अब तक केस में पुलिस के रोल की जांच करवाने की ही बात कर रहे हैं।
भास्कर ने अंबाला-पंचकूला के पुलिस कमिश्नर अजय सिंघल से सवाल किया कि
ज्योति मर्डर केस में पंचकूला पुलिस के रोल की पाेल कोर्ट की जजमेंट से खुल गई, तो अब कार्रवाई क्यों नहीं? जवाब में उन्होंने कहा कि केस का गिरना शर्मनाक है। मैं खुद जजमेंट को स्टडी करवा रहा हूं। अगले एक्शन का इंतजार कब तक करना होगा? इसके जवाब में सिंघल बोले- चुनाव सिर पर हैं, लेकिन ज्योति मर्डर केस भी उतना ही जरूरी है। डीजीपी से आदेश मिल चुके हैं, सात दिनों में इन्वेस्टिगेशन पूरी कर ली जाएगी। आरोपी बरी हो गए हैं, लेकिन अब लोगों में सवाल है कि हू किल्ड ज्योति, जवाब हमें देना है। सात दिनों में अगला एक्शन लिया जाएगा।
पंचकूला पुलिस ने कैसे कमजोर किया केस
सेशंस जज ने कहा था- पीपी ठीक से पैरवी नहीं कर रहे
23 अक्टूबर 2013 को केस की सुनवाई कर रहे सेशंस जज रवि कुमार सौंधी ने लिखित में कहा था कि पीपी (सरकारी वकील) ठीक से पैरवी नहीं कर रहे। वह कोर्ट में पूरी तैयारी के साथ नहीं आते। कोर्ट ने डीसीपी पंचकूला और डायरेक्टर पब्लिक प्रॉसीक्यूशन को लिखा कि पीपी और कांस्टेबल सिद्धार्थ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। कांस्टेबल सिद्धार्थ के टॉवर लोकेशन पर बयान होने थे। लेकिन वे कागजात नहीं लाए। फिर वो कागजात पेश कर दिए,जो चार्जशीट का हिस्सा नहीं थे। सिद्धार्थ के बयान करवाने में पीपी ने भी असमर्थता दिखाई।
पुलिस का फोटोग्राफर ही कोर्ट में मुकरा
11 अक्टूबर 2013 को पंचकूला पुलिस के फोटोग्राफर हवलदार तरसेम लाल ने कोर्ट में बयान दिए। कहा कि 22 नवंबर 2012 को जब ज्योति का शव सेक्टर 21 में मिला तो सारी तस्वीरें उसने ही खींची, लेकिन जब क्रॉस की बारी आई तो हवलदार तरसेम बदल गया। कहा की तस्वीरें उसने खींची। उन्हें सेक्टर 11 की प्राइवेट फर्म बालाजी लैब से डेवलप कराया। तस्वीरों में टेम्परिंग हो सकती है।
कोर्ट में क्रॉस के दौरान ऐसे पलटे एएसआई मांगेराम
ट्रायल के दौरान एएसआई मांगेराम ने बयान दिए कि ज्योति के कत्ल वाली रात उन्होंने 12 से 12.30 बजे के बीच एक आॅल्टो कार अमरटेक्स के पास लावारिस खड़ी देखी। कार की बैक सीट ही नहीं थी। वह कार चेक कर रहा था, ताे परमजीत सिंह आया, फिसर गुरमीत नाम का शख्स आया,उसने कागज दिखाए,तो उन्हें जाने दिया। बाद में बयान दिया कि उसे कार का नंबर याद नहीं।
एसआई सुभाष ने क्रॉस में माना कि जांच में क्या नहीं किया
कोर्ट में 10 जुलाई 2013 को एसआईटी में शामिल एसआई सुभाष के बयान दर्ज हुए। जबकि क्रॉस में वह खुद मानने लगे कि उन्होंने इन्वेस्टिगेशन की थी कि ज्योति के किसी दूसरे लड़कों से संबंध तो नहीं थे, उन्होंने क्राॅस में कहा कि ज्योति के किसी दूसरों से रिलेशन थे। बयान दिए कि ज्योति के किसी तजिंदर नाम के लड़के के संबंध में थे। कहा कि तजिंदर की स्टेटमेंट उसने ली थी, लेकिन उसे रिकाॅर्ड पर नहीं लाया। कोर्ट में यह भी कहा कि ज्योति किसी हरदीप, आकाश और गौरव के भी संपर्क में थी। यह भी कहा कि इनके बयान रिकाॅर्ड में नहीं लगाए।
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