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एसीपी सांगवान का इन्फॉर्मर कौन था, यह राज ही रह गया

7 वर्ष पहले
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राम कुमार चौधरी ने बुधवार को शिमला में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात की।
चंडीगढ़. ज्योति मर्डर केस में पुलिस ने ऐसा खेल खेला कि कोर्ट में कुछ भी साबित नहीं हो सका। केस की जांच का जिम्मा जिस एसीपी वरिंदर सांगवान पर था, उन्होंने कोर्ट में सबूतों की जगह सूत्रों का दावा पेश किया। कोर्ट में यह नहीं बताया कि इन्वेस्टिगेशन में ऐसे क्या सबूत उनके पास आए, जिनसे इस केस में राम कुमार चौधरी और उनके साथियों का नाम डाला गया।
उन्होंने कोर्ट में बयान दिए कि केस की जांच के दौरान एक गुप्तचर ने उन्हें सूचना दी कि जिस लड़की की लाश सेक्टर-21 में मिली है, उसका कत्ल राम कुमार चौधरी, धर्मपाल माडू, गुरमीत, परमजीत और चौधरी के ड्राइवर ने किया है। इन्फाॅर्मर ने उन्हें यह तक बताया कि इन सबने कत्ल के दौरान मोबाइल फोन नंबर 9816464060, 9816044340, 9882100009 और 9816046155 यूज किया। इन्फॉर्मर ने यहां तक जानकारी दे दी कि कौन सा फोन नंबर कौन यूज कर रहा था। अपने उस इन्फॉर्मर का नाम सांगवान ने उजागर नहीं किया, जो इस केस की इतनी बारीकियां जानता था।
सांगवान ने क्राॅस में दिए ऐसे बयान, जिसका आरोपियों को मिला फायदा
- एसीपी सांगवान ने कहा था- मैं नहीं बता सकता कि राम कुमार चौधरी ने अपने साथियों के साथ कब ज्योति को मारने का प्लान बनाया।
- केस में मेरी फाइंडिंग पांचों आरोपियों की इंटेरोगेशन के आधार पर है। यह सही है कि यदि इंटेरोगेशन के आधार पर कोई रिकवरी न हो तो इंटेरोगेशन के बयान कोर्ट में मान्य नहीं होते।
- जिस सरोज रानी और मनोज कुमार के नाम पर आरोपियों ने फेक नंबर लिए थे, उनके हस्ताक्षर के मिलान के लिए मैंने कोर्ट में एप्लीकेशन नहीं लगाई। मैंने उनके हस्ताक्षर का मिलान कराना जरूरी नहीं समझा, उनके बयानों पर ही विश्वास किया।
- आरोपियों की इंटेरोगेशन के दौरान मैंने किसी इंडिपेंडेंट विटनेस को साथ नहीं रखा। जब राम
कुमार हमें क्राइम की जगह दिखाने गया तब एमसी के अफसर ओपी सिहाग को इंडिपेंडेंट विटनेस के तौर पर साथ रखा।
- मैं यह नहीं बता सकता कि सरोज रानी और अरुण कुमार के नाम से जो सिम कार्ड इश्यू हुए वो कौन सी मोबाइल कंपनी के हैं।
- मैंने उन कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए डीसीपी पंचकूला की तरफ से एसपी कांगड़ा को चिट्ठी भिजवाई थी जिनके सिम फर्जी आईडी पर चल रहे थे। यह नहीं बता सकता कि किस तारीख को चिट्ठी भेजी, मैंने लेटर देखा भी नहीं। नहीं जानता कि चिट्ठी पर कोई एक्शन हुआ या नहीं।
- मैं नहीं जानता कि इशू की शादी में खींची गई राम कुमार चौधरी की तस्वीर कौन देकर गया।
- मैं नहीं जानता कि ज्योति ने जो आखिरी फोन किया, वह जोत के नाम पर था या नहीं। मेरे ध्यान में भी नहीं आया कि आखिरी बार किससे क्या बात हुई, उसको वेरिफाई किया जाए।
- मेरी इन्वेस्टिगेशन में सिम्मी नाम के किसी युवक का नाम सामने नहीं आया। (चार्जशीट में सिम्मी गवाह है)
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, डीजीपी यही कह रहे हैं कि आरोपी पुलिसवालों पर कार्रवाई होगी