पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कनिष्क कांड पीड़ितों पर रिसर्च करा रहा कनाडा

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
चंडीगढ़. कनिष्क कांड के पीड़ित परिवारों की वर्तमान हालत पर कनाडा सरकार रिसर्च करवा रही है। इसके साथ ही कनाडा में आतंकवाद का आधार बनने वाली सोच पर ही नजर रखने और सोशल मीडिया में कट्टरवाद को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर नजर रखने के लिए प्रोजेक्ट कनिष्क को शुरू किया गया है।
कनाडा सरकार ने इस प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में 17 लाख डॉलर का फंड भी जारी किया है। पहले चरणों में इस आतंकी वारदात में मारे गए लोगों की याद में एक मेमोरियल कनाडा में बनाया गया है। कनाडा में सिखों की अच्छी खासी आबादी है और आज भी ऐसे कई संगठन कनाडा में सक्रिय है जो कि खालिस्तानी विचारधारा को जिंदा रखे हैं।
पांच साल के लिए फंडिंग
अब कनाडा सरकार किसी भी प्रकार की आतंकी सोच या संगठन को विकसित नहीं होने देना चाहती है। कनाडियन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने प्रोजेक्ट का काम और तेज करने का भी निर्देश दिया है। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार पांच साल में 10 मिलियन डॉलर की फंडिंग करेगी।
329 लोगों की हो गई थी मौत
मॉन्ट्रियल से नई दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में 23 जून 1985 को आयरलैंड के तट के ऊपर हवा में हुए बम ब्लास्ट में सभी 329 यात्रियों की मौत हो गई थी। इनमें अधिकांश भारतीय मूल के लोग थे। खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने स्वर्ण मंदिर पर हुए सैनिक कार्रवाई के विरोध में इस हमले को अंजाम दिया था। आतंकवादियों ने दो सूटकेसों में बमों को रखा था। वेंकूवर में इन्हें एयर इंडिया की एक उड़ान और टोक्यो की एक उड़ान में रखा गया था।
रिसर्च के ऐसे 11 प्रोजेक्ट
रिसर्च प्रोजेक्ट्स पीड़ितों और आतंक पर किए जा रहे हैं। ऐसे 11 प्रोजेक्ट्स को फंडिंग मिल चुकी है। कनाडा के फेडरल मंत्री विक टोएस का कहना है कि हम सभी समुदायों की सुरक्षा को यकीनी बनाए रखना चाहते हैं। सरकार इस तरह के किसी भी संभावित खतरे को पहले ही भांप कर उसे अंजाम तक पहुंचने ही नहीं देना चाहती है।
सोशल मीडिया पर शोध कर रहे हैं अर्नव मनचंदा
इस फंड से अर्नव मनचंदा के एक प्रोजेक्ट को भी फंडिंग मिली है जो कि एक डिफेंस रिसर्चर हैं। वे सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट सोर्सेज से रेडिकलाइजेशन की प्रक्रिया को समझ उसकी समीक्षा कर रहे हैं।
अभी तक दंश झेल रहे हैं उस हादसे का
इस बम कांड में मारे गए 329 परिवारों को कनाडा सरकार ने मुआवजा प्रदान किया है लेकिन ऐसे कई परिवार हैं, जिनका एक-आध सदस्य ही बचा है। कई पीड़ितों में जीने की इच्छा तक खत्म हो चुकी है।