चंडीगढ़. मेरे माता-पिता 24 अगस्त को श्रीनगर गए थे। वे एक मंदिर में ठहरे हुए थे। रोजाना उनसे फोन पर बात हो रही थी। लेकिन 6 सितंबर की रात तक बात होती रही। 7 की सुबह मेरी पत्नी से बात हुई तो कहा हम यहां ठीक हैं लेकिन...। इसके बाद फोन बंद हो गए। वहां एक ही कंपनी एयरसेल का नेटवर्क चल रहा था। हम लोग लगातार फोन ट्राई करते रहे। लेकिन फोन बंद मिले। यह कहना श्रीनगर में बाढ़ में फंसे अपने माता-पिता को लेने गए उनके बेटे अरविंद हापा का।
अरविंद एचसीएल चीफ बिजनेस मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। वे पंचकूला में रहते हैं। अरविंद बताते हैं कि 8 से 10 के बीच वहां हालात और बिगड़ गए तो हमारी बेचैनी बढ़ने लगी।
फेसबुक और वह्टएप पर बहुत ही डरावने पिक्चर और अपडेट देखकर मन और घबरा गया। अरविंदर बताते हैं कि 11 को उन्होंने ठाना कि वे अपने माता-पिता को श्रीनगर से लाने के लिए आज ही निकल जाएंगे। उन्होंने स्पाइसजेट की फ्लाइट से टिकट बुक कराई और वहां पहुंचे। वहां उन्होंने अपने पुराने मित्र गुलाम नबी पॉल एयरपोर्ट पर लेने पहुंचे हुए थे। वे मुझे अपने घर रामबाग ले गए। अगले दिन सुबह रामबाग से मंदिर 7 किलोमीटर दूर था। चारों तरफ पानी भरा हुआ था।
आगे की स्लाइड्स में देखें, दोस्त मोहम्मद लतीफ ने की उनकी मदद..