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सीएम हाउस के सामने लड़की ने खुद काे जलाया, नौकरी न मिल पाने से दुखी

7 वर्ष पहले
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(फोटो: जली हुई लड़की)
चंडीगढ़. गुरदासपुर की रहने वाली 32 साल की अनाथ लड़की गुरप्रीत कौर ने सीएम प्रकाश सिंह बादल द्वारा दिलासा देने के 6 साल बाद भी नौकरी न मिल पाने से दुखी होकर शुक्रवार को सीएम आवास के सामने पेट्रोल छिड़ककर खुदकुशी करने की कोशिश की।
वह 35 फीसदी जल गई है। सीएम आवास के बाहर खड़े गार्ड ने कंबल से आग बुझाई और पीसीआर को इसकी सूचना दी। पुलिस ने उसे सेक्टर 16 के जनरल अस्पताल में भर्ती कराया। लड़की के शरीर का निचला हिस्सा बुरी तरह से जल गया है। हालांकि, डॉक्टर लड़की की हालत खतरे से बाहर बता रहे हैं।
पंजाब सरकार भरोसा दिलाती है, करती कुछ नहीं
गुरप्रीत कौर ने कहा कि मैं इस समय अस्पताल में हूं। बिस्तर पर लेट पाना मेरे लिए मुश्किल हो रहा है। जले हुए शरीर के साथ मैं बर्दाश्त न हो सकने वाली तकलीफ से गुजर रही हूं। डॉक्टर कहते हैं मैं 35 फीसदी जली हूं। पर सच ये नहीं है।
मैं 35 फीसदी जले हुए शरीर और हजार फीसदी जले हुए मन के साथ इस बिस्तर तक पहुंची हूं। और ये सब हुआ है हमारे पंजाब के सीएम और उनके अमले की मेहरबानी से। मैंने अपने आपको आग तो खुद लगाई लेकिन मुझे इस हालत तक पहुंचाने वाले ये ही लोग थे। बीस साल से अनाथ हूं। पहले गीता भवन गुरदासपुर में रहती थी, अब 17 साल से हरमंदिर साहब अमृतसर में रह रही हूं। इस सब को अपना भाग्य मानकर मैंने समझौता कर लिया। मैंने मान लिया था कि रब ने मेरे लिए यही लिखा है। ये सब शायद ऐसे ही चलता रहता अगर मैंने 6 साल पहले अमृतसर के संगत दर्शन में बड़े बादल साहब को न देखा होता। उन्हें देखकर मुझे लगा कि रब ने मेरे लिए कुछ अच्छा सोचकर ही उनसे मिलवाया है। मैंने उनसे कहा-साहब अनाथ हूं कहीं नौकरी लगवा दो।
उन्होंने पूछा-आप कितना पढ़े हो ? तो मैंने बताया कि मैं 12वीं तक पढ़ी हूं। इस पर बादल साहब ने कहा कि आप कंप्यूटर कोर्स कर लो। उनके कहने पर मैंने दो साल का कंप्यूटर कोर्स भी कर लिया। ये सब हुए भी अब चार साल हो चुके हैं। इन चार साल में मैं 4 बार बड़े बादल और 3 बार छोटे बादल साहब को मिली। मैंने उन्हें हर बार बताया कि आपके कहने पर ही मैंने कंप्यूटर कोर्स किया है अब तो मेरी नौकरी लगवा दो। हर बार बादल साहब अपने पीए को मेरे लिए कुछ करने की बात कहकर चले गए। मैंने जब पीए से बात की तो उसने मुझे आगे किसी और का नंबर दे दिया। मैं 14 लोगों से मिली। 27 बार मुझसे नौकरी की एप्लीकेशन लिखवा ली गई। ये सब हुआ पर नौकरी नहीं मिली। चार दिन पहले मैं ये सोचकर चंडीगढ़ आई कि एक बार फिर से मिलकर सीएम साहब को इस बारे में बताऊंगी। मैं यहां चंडीगढ़ के गुरद्वारे में रह रही थी। मैं रोज सीएम साहब की कोठी पर जा रही थी। पर सिक्योरिटी वाले मुझे उनसे मिलने नहीं दे रहे थे। यहां तक कि मुझे उस पीए से भी मिलने नहीं दिया जा रहा था जिसने मुझे इतने चक्कर में डाला था।
शुक्रवार सुबह सवा नौ बजे एक बार फिर मैं सीएम साहब की कोठी पर पहुंची। मैंने वहां मौजूद गार्ड से कहा कि साहब से मिलना है। उसने मना कर दिया कि साहब हैं नहीं। मैं बार-बार कहती, विनती करती रही पर मेरी एक न सुनी गई। अब मेरा सब्र टूटने लगा था। मैं निराश हो चुकी थी। मैं कहां जाऊं-क्या करूं ये सोचते हुए मुझे बस एक ही ख्याल आया कि मैं अपनी जान दे दूं। मेरी मौत पर तो कोई रोने वाला भी नहीं है। टूटे हुए मन के साथ मैंने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़का और आग लगा ली, ये सोचते हुए कि शायद मेरे बाद ये लोग किसी और गुरप्रीत के साथ ऐसा झूठा खेल न खेलें। नौकरी नहीं देनी, न दें किसी को झूठी उम्मीद का सपना दिखाकर इस तरह जलील तो न करें।
ऐसे लगाई आग
शुक्रवार सुबह 9.15 बजे गुरप्रीत कौर सीएम हाउस पहुंची। जहां उसने सीएम से मिलने की जिद की। सिक्योरिटी गार्ड्स ने कहा कि सीएम नहीं हैं। लड़की ने उनके पीए से मिलने को कहा। उस पर भी उसे मना कर दिया गया। इस पर लड़की 10 मिनट बाद वापस एक प्लास्टिक के डिब्बे के साथ पहुंची। डिब्बे में पेट्रोल था,जिसे सिक्योरिटी गार्ड्स के सामने उसने अपने ऊपर छिड़क लिया और आग लगा ली।
लड़की ने आपबीती सुनाई और कहा कि नौकरी के झूठे दिलासे से तंग आकर उसने आत्महत्या का प्रयास किया। उसने बताया कि वह अमृतसर में 6 साल पहले संगत दर्शन के दौरान सीएम प्रकाश सिंह बादल से मिली थी और नौकरी की मांग की थी। तब वह 12वीं पास थी। सीएम ने ही उसे कंप्यूटर कोर्स करने की सलाह दी थी। उसके मुताबिक, कंप्यूटर कोर्स किए भी उसे 4 साल हो गए। वह कई बार सीएम और डिप्टी सीएम से मिली। वे अपने पीए को उसकी एप्लीकेशन दे देते थे। इसके बाद भी आज तक उसे नौकरी नहीं मिली और अब ताे उसे मिलने भी नहीं दिया जा रहा।
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