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कैश डालने वाले तीन कर्मी व सात एटीएम से दो करोड़ गायब

7 वर्ष पहले
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फिरोजपुर/बठिंडा। एटीएम में कैश लोड करने वाली एक दूसरी प्राइवेट कंपनी के तीन कर्मचारी ठीक उसी तरह लापता हो गए, जैसे फरीदकोट से मनोज गायब हुआ था। तब 19 लाख रुपए चोरी हुए थे, इस बार करीब दो करोड़ रुपए। ताजा मामला मुक्तसर, मलोट और फािजल्का के सात एटीएम से पासवर्ड डालकर पैसे उड़ाने का है।
मोहाली की कंपनी आईएसएसएसडीबी सिक्योरिटी सर्विस के तीन कर्मचारी 20 सितंबर से गायब हैं। मुक्तसर के एसएसपी कुलदीप सिंह ने बताया कि केस दर्ज कर लिया गया है, लेकिन ये साफ नहीं है कि पैसे कर्मचारियों ने उड़ाए या किसी और ने। स्थानीय पुलिस के हाथ खाली हैं, ठीक वैसे ही जैसे तीन महीने पहले गायब हुए मनोज के मामले में 12 अफसरों वाली 68 सदस्यीय एसआईटी के। चार महीने में इस तरह की यह तीसरी बड़ी घटना है।
घटनाएं तीन, तरीका एक
25 मई : फरीदकोट में एसआईएस कंपनी का मनी लोडर मनोज गायब। उसी दिन तीन एटीएम से 19 लाख रु. निकले।
14 सितंबर: इसी कंपनी के बलजिंदर ने तरनतारन में 26 लाख उड़ाए। पर वह पकड़ा गया।
20 सितंबर: मोहाली की कंपनी के तीन कर्मी गायब।
तीनों बार पासवर्ड डालकर पैसे निकले।
20 सितंबर से फोन स्विचऑफ
कंपनी ने सात एटीएम काउंटरों में कैश लोड करने की ड्यूटी तीन कर्मचारियों जगसीर सिंह, मुकेश कुमार (दोनों गांव खुईखेड़ा) और गुरचरण सिंह गांव कीमाखेड़ा को सौंपी थी। 20 सितंबर के बाद से उनके फोन स्विचऑफ हैं। रुपए डालने के बाद पासवर्ड लगाकर पैसे निकाल भी लिए गए। ऑडिट में जब ये बात सामने आई तो कंपनी के मालिक कर्नल एन.आर मिनहास ने पुलिस को शिकायत दी।
निजी कंपनियों पर ही सवाल
पहली घटना के बाद से ही कंपिनयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जो कर्मी एटीएम में पैसा डालने जाते हैं, उनकी सैलरी 8-9 हजार होती है।
पुलिस की जांच बलजिंदर तक
तरनतारन वाली घटना के आरोपी बलजिंदर से पूछताछ में कुछ नहीं निकला। इसके अलावा कोई भी ऐसी कड़ी नहीं मिली, जिससे केस सुलझ सके।
उधर, आंध्रप्रदेश में भी ऐसी ही घटना
मनोज वाले मामले की जांच के दौरान मोगा पुलिस को पता चला कि आंध्रप्रदेश में भी इसी तरह एटीएम लूटे गए हैं। यह सूचना दस दिन पहले मिली थी। इसके बावजूद पुिलस ने वहां से सीसीटीवी फुटेज नहीं मंगवाई।