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चाय के लिए पैसे नहीं, पर फॉरेन टूर को तैयार चीफ इंजीनियर और एसई

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. चाय-पानी के खर्च के लिए नगर निगम के पास पैसे नहीं हैं। को-ऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक में मेयर को बजट रिलीज कराने के लिए एडवाइजर से गुजारिश करनी पड़ती है।
दूसरी तरफ, नगर निगम के ही चीफ इंजीनियर एसएस बिड्डा और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर मुकेश आनंद 16-23 मई तक विदेश दौरे पर जाने की तैयारी में हैं। वो भी नगर निगम की इजाजत के बगैर। इन दोनों अफसरों के विदेश दौरे पर 4 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। इन्हें सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर स्टडी के नाम पर भेजा जा रहा है।
चीफ इंजीनियर बिड्डा को तब भी इस टूर पर भेजा जा रहा है, जब 31 मई को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चीफ इंजीनियर पद के लिए निगम ने हरियाणा से पैनल तक मंगवा लिया है। बिड्डा इस स्टडी टूर पर जाते है तो इसका कोई भी फायदा निगम को नहीं मिल पाएगा। एसई मुकेश आनंद निगम में प्रशासन से डेपुटेशन पर हैं। कार्यकाल पूरा होने के बाद वह भी प्रशासन में लौट जाएंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर की स्टडी करेंगे: चीफ इंजीनियर और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर को साउथ ईस्ट एशियन देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर की स्टडी के लिए भेजा जा रहा है। इंजीनियर्स डेवलपमेंट काउंसिल की ओर से इस स्टडी टूर का आयोजन किया जा रहा है। निगम कमिश्नर वीपी सिंह ने बिड्डा और आनंद के नाम की मंजूरी दी है।
इंजीनियर्स डेवलपमेंट काउंसिल ने यह स्टडी टूर विशेष रूप से उन लोगों के लिए तैयार किया है जो सरकार, स्थानीय निकाय तथा कॉरपोरेट सेक्टर में निर्णय लेने वाले पदों पर हों। नगर निगम में सभी बड़े फैसले निगम के सदन में लिए जाते हैं। लेकिन टूर के बारे में पार्षदों को जानकारी तक नहीं है।
चीफ इंजीनियर और एसई स्टडी टूर के लिए जा रहे हैं। इसका शहर को लाभ मिलेगा। बिड्डा अभी निगम में हैं। हरियाणा में जाएंगे तो वहां भी फायदा होगा। इस स्टडी टूर का खर्च केंद्र से रिफंड हो जाएगा। इस टूर की मंजूरी एडमिनिस्ट्रेटर ने दी है।
विवेक प्रताप सिंह, निगम कमिश्नर
परमिशन लेनी चाहिए
निगम एक इलेक्टेड बॉडी है। अफसर विदेशी टूर पर जा रहे हैं, तो पहले इसकी इजाजत एफएंडसीसी और हाउस से लेनी चाहिए। पार्षदों को पता होना चाहिए कि अफसर किस प्रोजेक्ट के लिए विदेश जा रहे हैं। निगम कोई एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी नहीं है, जो अफसर अपनी मर्जी करें।
-प्रदीप छाबड़ा, पार्षद
इसकी जानकारी तक नहीं
हमें तो इसकी जानकारी तक नहीं है। निगम के लाखों रुपए बर्बाद किए जा रहे हैं। यह मामला सदन में उठाया जाएगा। ऐसे अफसरों को स्टडी टूर पर भेजने का क्या फायदा जिनका लाभ निगम को नहीं मिल पाएगा। एफएंडसीसी से पहले परमिशन लेनी चाहिए थी।
-मुकेश बस्सी, पार्षद
फंड की कमी, तो टूर कैसे
निगम के पास पहले ही फंड की कमी है। ऐसे में बिना एफएंडसीसी और सदन की इजाजत के अफसर विदेश दौरे पर कैसे जा सकते हैं? एसएस बिड्डा का तो निगम में कार्यकाल ही खत्म हो रहा है। उनके टूर का निगम को कोई लाभ भी नहीं होगा। मुझे इसकी जानकारी तक नहीं दी गई है।
-सुभाष चावला, मेयर