चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से सेवानिवृत जस्टिस निर्मल यादव के घर 15 लाख रुपये पहुंचाने के मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई की स्पेशल कोर्ट को अगले 30 दिन में आरोप तय करने पर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस परमजीत सिंह ने जस्टिस यादव की अपने खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दिए जाने से जुड़ा रिकार्ड दिए जाने की मांग संबंधी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वे चाहें तो 15 दिन में रिकार्ड का निरीक्षण कर सकती हैं। इसके बाद अगले 15 दिन में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट आरोप तय करने पर फैसला ले।
इस संबंध में निर्मल यादव की याचिका पहले चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने खारिज कर दी थी। ऐसे में अब उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रिकार्ड दिए जाने की मांग की थी। याचिका में चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत के दो फरवरी के फैसले को खारिज करने की मांग की गई है जिसमें मुकदमा चलाने की अनुमति दिए जाने का रिकार्ड दिए जाने की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था।
कहा गया कि वे चाहें तो रिकार्ड का निरीक्षण कर सकती हैं लेकिन उन्हें इसकी प्रति नहीं दी जा सकती। सीबीआई की दलील थी कि कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है कि वे इन दस्तावेजों की प्रति दें। दूसरी तरफ निर्मल यादव के वकील ने कहा कि भारी भरकम दस्तावेज होने के कारण वे इसका निरीक्षण नहीं कर सकते लिहाजा प्रति दी जाए।
जज नोटकांड
13 अगस्त 2008 की रात को हाईकोर्ट के वकील व उस समय हरियाणा के एडीशनल एडवोकेट जनरल संजीव बंसल ने अपने मुंशी को जस्टिस निर्मल के यहां 15 लाख रुपये देने के लिए भेजा था। मुंशी ने गलती से यह राशि जस्टिस निर्मलजीत कौर के यहां पहुंचा दी। इस पर जस्टिस निर्मलजीत कौर के नौकर ने पुलिस में शिकायत कर दी थी।
सीबीआई के मुताबिक जस्टिस यादव ने सोलन में जमीन खरीदी थी। जमीन की कीमत चुकाने के लिए रकम भेजी गई थी। इस मामले को लेकर पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया केजी बालाकृष्णन ने इन हाउस कमेटी का गठन किया था।
कमेटी इस नतीजे पर पहुंची थी कि 13 अगस्त 2008 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की जज निर्मलजीत कौर के घर पहुंचा 15 लाख रुपये का पैकेट जज निर्मल यादव के लिए ही था। इसके बाद राष्ट्रपति ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी।