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  • एक्सप्रेस वे पर ट्रैफिक से होकर गुजरे बच्चे

गाड़ियों के बीच एक्सप्रेस वे पर दौड़ाया बच्चों को, कोई रोया तो किसी की फूली सांस

6 वर्ष पहले
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मोहाली। मोहाली केसेक्टर 67 स्थित द मिलेनियम स्कूल और सीआईआई-वाई की तरफ से यूथ रन फॉर स्वच्छ भारत अभियान के तहत शनिवार को स्कूल में मिनी मैराथन कराई। इसमें कई खामियां नजर आई, जो बच्चे एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक के बीच से होकर गुजरे जिससे सड़क हादसे का डर बना रहा।
इस मैराथन का मकसद स्वच्छ भारत अभियान के प्रति बच्चों को जागरूक करना है। बच्चे एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक के बीच से होकर गुजरे जिससे सड़क हादसे का डर बना रहा। अव्यवस्था इस कदर हावी रही कि किसी बच्चे की सांस फूलने लगी तो कोई रोने लगा। यहां तक की एक बच्चे की हालात तो बहुत खराब हो गई।

ट्रैफिक के बीच ही दौड़ बच्चे: इस मैराथन में ट्राईसिटी के अलग-अलग स्कूलों से आए 8 साल, 10 साल, 12 साल व 15 एज ग्रुप के 1200 स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। सबसे पहले 8 साल एज ग्रुप में स्टूडेंट्स की एक किलाेमीटर, उसके बाद 10 व 12 साल एज ग्रुप के दौड़ दो किलोमीटर और उसके 15 साल तक के 5 से 6 किलोमीटर तक दौड़े। सभी मैराथन स्कूल के गेट से शुरू हुई। एक भी ट्रैफिककर्मी सड़क पर नहीं दिखा कि जहां से स्टूडेंट्स ने दौड़ना है वहां पर वाहनों की आवाजाही रोक दी जाए।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एथलेटिक्स कोच व इस प्रतियोगिता में अपने बच्चों को भाग दिलवाने वाले जुलफकर ने बताया कि प्रतियोगिताएं आयोजित करवाना बहुत अच्छी बात है, लेकिन दिखावे के लिए गलत। स्कूल की तरफ से जो मिनी मैराथन आयोजित करवाई गई उसमें कई कई खामियां थी। रास्ते में कहीं पानी की प्रबंध नहीं था, एंबुलेंस काफी पीछे थी, रनिंग स्टेशन नहीं था। सबसे बड़ी बात स्टूडेंट्स के लिए मैराथन नहीं होती उसको क्राॅस कंट्री कहते हैं। एक तरफ से वाहन आ जा रहे हैं वहीं बच्चे दौड़ रहे हैं। कुल मिलाकर यदि कोई प्रोफेशनल स्पोर्ट्स पर्सन को साथ लेते तो वह पूरी व्यवस्था करता। इस मिनी मैराथन को देखकर लगा नहीं कि इसमें कोई प्रोफेशनल शामिल होगा।
यह रही कमियां
{किसी भी एज ग्रुप के बच्चे के लिए सड़क पर दौड़ के समय ट्रैफिक नहीं रोका गया और न ही साइड में किया।
{रास्ते में कहीं पर भी बच्चों के लिए पीने के पानी का टेंट नहीं लगाया गया था।
{ बच्चों ने दौड़ पूरी की उनको रिफ्रेशमेंट में जूस या फ्रूट देने के बजाय सैंडविच दिया जा रहा था।
{स्कूल की तरफ से रास्ते में जगह जगह वॉलंटियर्स थे, लेकिन ऐसा कोई साधन नहीं था कि गिरते बच्चों को तुरंत उठाकर अस्पताल लेकर जा सके।
{दौड़ के आगे करीब 15 मीटर पर एक पायलेट गाड़ी होती है जोकि रास्ता साफ करवाती जाती है और बच्चों पर नजर रखती है। वह गाड़ी काफी आगे थी।
{जहां से प्रतियोगियों ने गुजरना होता है वहां पर रास्ते में एंबुलेंस होनी चाहिए, लेकिन यहां पर एंबुलेंस सबसे पीछे थी।
हमें इस बारे में कोई सूचना नहीं आई थी: डीएपी ट्रैफिक
'हमें इस बारे में कोई सूचना नहीं आई थी। छोटे बच्चों की किस बात की मैराथन। एक तरफ बच्चे और उसके साथ गाड़ियां गुजर रही थी। यह गलत बात है। इसके बारे कोई जानकारी आई ही नहीं।' -रात चंदर, डीएसपी ट्रैफिक
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