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सस्पेंड किया, रिमांड पर लेना मुनासिब न समझा पुलिस ने

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. शांतिकुंज में सैर कर रहे एमबीए के छात्र विजय शर्मा और छात्रा से लूट करने, छात्रा पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने वाले कांस्टेबल शक्ति राज उर्फ अनिल और कुलदीप पर पुलिस मेहरबान है। 25 जनवरी की देर रात दोनों कांस्टेबलों को पकड़ा और इसके बाद 26 जनवरी को ही उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। दोनों को पुलिस रिमांड पर लेने की जरूरत ही नहीं समझी गई। रातों रात ही पुलिस ने कहा कि आरोपियों से छात्रा के कान के झुमके बरामद कर लिए गए हैं। इतना ही नहीं, उनके साथ और कौन पुलिस वाले शामिल रहे हैं? पहली बार इस तरह का हौसला कैसे हुआ? इसकी जानकारी हासिल ही नहीं की। यह तब है कि मौके पर पकड़े जाने पर पहले आरोपी कांस्टेबल ने पुलिस को कई बार गुमराह किया।

आरोपी ने पहले कहा कि वह पुलिस में नहीं है, बल्कि मोहाली के रेस्तरां में सिक्योरिटी गार्ड है। जब माना कि पुलिस में है, तो कहा कि पीसीआर में तैनात है। आधे घंटे बाद कहा कि पुलिस के चीता स्टाफ में है। एसएसपी सुखचैन सिंह गिल तक यही जानकारी पहुंची। इसके बाद फिर बदला, कहा कि आईआरबी में है और उसका नाम शक्तिराज है। पुलिस ने छात्रा से फोन रिकॉर्डिंग भी हासिल कर ली है। डीएसपी आशीष कपूर का कहना है कि आरोपी सच बताते रहे, इसलिए उनका रिमांड हासिल करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। गिरफ्तारी के चलते दोनों कांस्टेबलों को सस्पेंड कर दिया गया है।

कहा था- झुमके चाहिए तो होटल चलना होगा

20 जनवरी को शांतिकुंज में बैठे पीयू की एमबीए की छात्रा और छात्र विजय शर्मा से कांस्टेबल शक्तिराज और कुलदीप ने 200 रुपए और झुमके ले लिए थे। छात्रा का फोन नंबर लेकर कहा था कि 1000 रुपए देकर झुमके ले जाना। इसके बाद छात्रा को फोन करके कहा था कि पैसे नहीं हैं और झुमके चाहिए तो होटल चलना पड़ेगा। छात्रा ने ये बातचीत रिकॉर्ड कर पुलिस को दी थी। 25 जनवरी की रात पुलिस ने ट्रैप लगाकर दोनों आरोपियों शक्तिराज उर्फ अनिल और कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया था।