चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री के तीन सलाहकार व दो ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) की नियुक्ति खारिज करने की मांग याचिका पर मंगलवार को पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जवाब दायर कर कहा कि इन सभी की नियुक्ति इनका अनुभव देखकर की गईं। ये नियुक्तियां स्थायी नहीं हैं।
कार्यकारी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इन्हें मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का सहयोग करने के लिए लगाया गया। इन सभी को मंत्री के समान दर्जा भी दिया गया है। सरकार के इस जवाब के बाद कार्यकारी चीफ जस्टिस जसबीर सिंह व जस्टिस आरके जैन की खंडपीठ ने 19 जुलाई के लिए मामले पर अगली सुनवाई तय की है।
रोपड़ निवासी दिनेश चड्ढा की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि कमल ओसवाल को मुख्यमंत्री का औद्योगिक सलाहकार, कमल शर्मा को राजनीतिक सलाहकार (अब इस्तीफा दे चुके हैं) व महेश इंदर सिंह ग्रेवाल को सलाहकार व गुरचरण सिंह व बलकरण सिंह को मुख्यमंत्री का ओएसडी नियुक्त करने का फैसला खारिज किया जाए।
याचिका में कहा गया कि ये सभी नियुक्तियां महज राजनीतिक आधार पर की गई, जबकि इनके लिए कोई आवेदन नहीं मांगे गए। ऐसे में यह समानता के अधिकार की अनदेखी है जिसमें महज करीबी लोगों को ही लाभ पहुंचाने का फैसला लिया गया। ऐसे में नियुक्तियां खारिज की जाएं।
आवेदन भी नहीं मांगे: याचिका में कहा गया कि इन सभी नियुक्तियों के लिए आवेदन मांगे जाने चाहिए थे और सभी योग्य लोगों को इस पद पर अपनी दावेदारी पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए था। ऐसे में नियुक्तियां खारिज कर नए सिरे से आवेदन मांगने के बाद नियुक्तियां की जाएं।
कैबिनेट मंत्री के समान वेतन और वित्तीय लाभ
याचिका में कहा गया कि तीनों सलाहकार पंजाब के कैबिनेट मंत्री के समान लाभ हासिल कर रहे हैं। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के हवाले से कहा गया कि कमल ओसवाल ने जहां अपनी इच्छा से सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार कर दिया है।
महेश इंदर सिंह 30 हजार रुपए प्रति माह का मानदेय ले रहे हैं। इसके अलावा दो लाख रुपए वार्षिक विजिटिंग अलाउंस, सरकारी दौरे के दौरान एक हजार रुपए डेली अलाउंस, 50 हजार तक मासिक हाउस रेंट, 10 हजार तक मासिक टेलीफोन खर्च, ड्राइवर के साथ स्टाफ कार, 5 हजार ऑफिस के लिए मासिक इंटरटेनमेंट खर्च, एक निजी सचिव, क्लर्क, चपरासी व स्टेट फंड से चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। ओएसडी को भी 30 हजार रु. प्रति माह का मानदेय, ऑफिस व घर पर टेलीफोन की सुविधा, चंडीगढ़ में सरकारी फ्लैट व पब्लिक फंड से स्टाफ कार की सुविधा दी जा रही है।