चंडीगढ़। साउथ एशिया का पहला नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थकेयर इंजीनियरिंग एंड आर्किटेक्चर पीजीआई के हाथ से जा सकता है। डेढ़ साल पहले मिले इस प्रोजेक्ट के लिए पीजीआई जमीन तक फाइनल नहीं कर पाई। हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मिनिस्ट्री ने पीजीआई से पूछा है कि क्यों न इस प्रोजेक्ट को कैंसिल कर दिया जाए। क्या वाकई पीजीआई को इस इंस्टीट्यूट की जरूरत है? पीजीआई के फाउंडर्स डे पर पिछले साल 5 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये इंस्टीट्यूट पीजीआई को देने की घोषणा की थी।
डेढ़ साल पहले हेल्थ मिनिस्टर ने कहा था- साउथ एशिया में ऐसा दूसरा संस्थान नहीं
इसलिए अहम है ये प्रोजेक्ट
साउथ एशिया के पहले ऐसे इंस्टीट्यूट में हॉस्पिटल मैनेजमेंट को संभालने वाले प्रोफेशनल तैयार किए जाने हैं। यहां पर हेल्थ फैसिलिटी प्लानिंग एंड डिजाइनिंग, हेल्थ केयर इंजीनियरिंग, हेल्थ इंस्टीट्यूशन मैनेजमेंट और फाइनेंशियल एंड मैनेजरियल सिस्टम इन हेल्थ इंस्टीट्यूशन जैसे मास्टर कोर्सेस शुरू होने हैं। इन कोर्सेस के बाद ये प्रोफेशनल्स देश के दूसरे संस्थानों को संभालने की जिम्मेदारी उठा सकेंगे। इसी इंस्टीट्यूट में पेशेंट केयर से जुड़ी स्पेशलाइजेशन के लिए लैब और दूसरे जरूरी उपकरण भी रखे जाने हैं।
90 करोड़ का प्रोजेक्ट: हेल्थ मिनिस्ट्री अौर आईसीएमआर को देनी है मदद
लगभग 90 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री को वित्तीय मदद करनी है। पिछले साल जुलाई में पीजीआई को प्रोजेक्ट देते वक्त हेल्थ मिनिस्टर गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि हेल्थ सेक्टर में साउथ एशिया में ऐसा कोई इंस्टीट्यूट नहीं है। लेकिन इसका प्रोसेस ही न शुरू होने पर आइसीएमआर ने पीजीआई से जानकारी मांगी थी। पीजीआई ने कोई जवाब नहीं दिया। अब मिनिस्ट्री ने यूपीए सरकार के समय मंजूर हुए प्रोजेक्ट की समीक्षा की तो पाया गया कि पीजीआई ने कोई प्रोसेस ही शुरू नहीं किया है। इस वजह से ही अब पीजीआई से जवाब मांगा गया है।
पहला कदम ही नहीं बढ़ा पाया पीजीआई
इस प्रोजेक्ट के लिए पीजीआई को जमीन ढूंढ़कर होम मिनिस्ट्री से इंस्टीट्यूट शुरू करने की अप्रूवल लेनी थी। फिर इंस्टीट्यूट का स्ट्रक्चरल डिजाइन बनना था। इस स्ट्रक्चर के मुताबिक बजट एस्टीमेट तैयार करके हेल्थ मिनिस्ट्री को मंजूरी के लिए भेजा जाना था। बजट एस्टीमेट मंजूर होने के बाद डिटेल्ड नोटिस इन्वायटिंग टैंडर प्रक्रिया शुरू होनी थी। लेकिन पीजीआई पहला कदम ही नहीं उठा पाया।
किसी और को मिल सकता है इंस्टीट्यूट
पीजीआई को सारंगपुर में प्रशासन 150 एकड़ जमीन देने का फैसला कर चुका है। पीजीआई ने इस जमीन पर कैंसर हॉस्पिटल और पीजीआई की एक्सपैंशन का प्लान मंजूरी के लिए मिनिस्ट्री को भेजा है। अब इस नए इंस्टीट्यूट के लिए पीजीआई के पास जमीन नहीं है। ऐसे में ये इंस्टीट्यूट किसी और संस्थान को भी मिल सकता है।
एक दूसरे पर टाल रहे जिम्मेदारी
पीजीआई के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के आॅफिस इंचार्ज इंजीनियरिंग प्रो. केएलएन राव से इस इंस्टीट्यूट के मौजूदा स्टेटस के बारे में पूछा गया तो उनका सिर्फ इतना कहना था कि इस इंस्टीट्यूशन के स्टेटस के बारे में पीजीआई डायरेक्टर प्रो. योगेश चावला ही बता सकते हैं।
पीजीआई प्रवक्ता मंजू वडवलकर से इस बारे में जब पूछा गया कि इस प्रोजेक्ट का स्टेटस क्या है तो उनका सिर्फ इतना कहना था कि प्रो. केएलएन राव बता सकते हैं। फिर प्रो. राव का हवाला दिया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि इस प्रोजेक्ट के लिए कुछ नहीं किया गया। बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने में थोड़ा समय लगता है। पीजीआई इसे लेकर गंभीर है।